June 4, 2026

सोनीपत: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में किसानों का प्रदर्शन ज्ञापन सौंपा

Sonipat: Farmers protest against India-US trade agreement, submit memorandum

सोनीपत: भारतीय किसान यूनियन के नेता ज्ञापन देते हुए।

सोनीपत, अजीत कुमार। सोनीपत में भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) तथा भारतीय किसान यूनियन (चडूनी) ग्रूप के आह्वान पर गुरुवार को झरोठी टोल प्लाजा, गाहाना सोनीपत में किसानों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ विरोध जताया। इसके बाद ज्ञापन सौंपा।

प्रदर्शन का नेतृत्व जिला प्रधान बेदी दहिया, प्रदेश सचिव वीरेंद्र खोखर, गोहाना ब्लॉक प्रधान राजबीर माजरा और युवा जिला प्रधान प्रवीण दहिया सहित अन्य किसान नेताओं ने किया। आदि किसानों ने मांग की कि कृषि, डेयरी, पोल्ट्री, पशुपालन, मत्स्य पालन तथा अन्य कृषि आधारित क्षेत्रों को प्रस्तावित व्यापार समझौते से पूरी तरह बाहर रखा जाए।

भरतीय किसान यूनियन, चढूनी हरियाणा के प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यवान नरवाल ने कहा कि भारत की बड़ी आबादी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है, जबकि अमेरिका की कृषि व्यवस्था बड़े निगमों, आधुनिक तकनीक और भारी सरकारी सहायता पर आधारित है। ऐसे में दोनों देशों के किसानों के बीच सीधी प्रतिस्पर्धा भारतीय किसानों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।

किसानों का कहना है कि यदि अमेरिकी कृषि, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों को कम शुल्क या शुल्क मुक्त भारत में प्रवेश दिया गया तो देश के करोड़ों छोटे किसानों, पशुपालकों और डेयरी उत्पादकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। सस्ते आयातित उत्पादों से घरेलू बाजार प्रभावित होगा और किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल सकेगा।

किसान नेताओं ने आशंका जताई कि इस तरह के समझौते से कृषि आधारित रोजगार, ग्रामीण उद्योग और इससे जुड़ी गतिविधियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उनका कहना है कि खाद्य सुरक्षा और खाद्य आत्मनिर्भरता पर भी खतरा बढ़ेगा तथा देश आवश्यक खाद्य वस्तुओं के लिए आयात पर अधिक निर्भर हो सकता है।

संयुक्त किसान मोर्चा ने मांग की कि किसी भी व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से पहले किसान संगठनों से व्यापक चर्चा की जाए। किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य, सार्वजनिक खरीद प्रणाली और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी नीतियों से किसी प्रकार का समझौता नहीं करने की मांग भी उठाई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि किसानों की आजीविका और कृषि क्षेत्र की सुरक्षा को व्यापारिक हितों से ऊपर रखा जाना चाहिए।

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