July 8, 2026

कवि दल्लीचंद जांगिड़

पंच महायज्ञ परमपिता परमात्मा ने सबसे सुंदर जीव मनुष्य की रचना की है। इसको बोलने की, समझने की, हंसने की...

अरे हल्दीघाटी री माटी बोलै है, चेतक री टापां आज भी डोलै है, कुण कहवै राणा हार'र गयो, अरे वो...

मुंबई , जीजेडी न्यूज। जब हम गांवों में थे तब हमारा विकास मंद गति का था, लेकिन हम सबके साथ...

जांगिड़ ब्राह्मणों से करते है हम यह निवेदन.... खुद जाग के समाज को जगा दो जांगिड़ ब्राह्मणों। कर्त्तव्य जानो और...

नदियां कल कल बहती रहती पहाड़ों से उछल-कूद कर पत्थरों से टकराती बल खाती नाग-मोड़ तीव्र चाल ये चलती अपना...

बच्चे के जन्मते ही घर परिवार में खुशीयां छाई हजार। महिलाओं ने मंगळा गीत गाए चार, माँ फुली न समाई...

हर काम सोच समझकर करिये, कारण आपके हर शब्द ईश्वरीय रिकॉर्ड व्यवस्था (कुदरत में) में दर्ज होकर "ऐवरी ऐक्शन ईज...