पंच महायज्ञ परमपिता परमात्मा ने सबसे सुंदर जीव मनुष्य की रचना की है। इसको बोलने की, समझने की, हंसने की...
कवि दल्लीचंद जांगिड़
अरे हल्दीघाटी री माटी बोलै है, चेतक री टापां आज भी डोलै है, कुण कहवै राणा हार'र गयो, अरे वो...
मुंबई , जीजेडी न्यूज। जब हम गांवों में थे तब हमारा विकास मंद गति का था, लेकिन हम सबके साथ...
पं. सत्यपाल जी वत्स की प्रवचन श्रृंखला से.... बीज भी जब माटी के अंदर गहरे में जाकर शांत हो जाता...
जांगिड़ ब्राह्मणों से करते है हम यह निवेदन.... खुद जाग के समाज को जगा दो जांगिड़ ब्राह्मणों। कर्त्तव्य जानो और...
🕉️ ध्यान और मन 🕉️ "" "" "वर्तमान मे निरन्तर समाज में बदल रही सामाजिक परिस्तिथियों में हर कोई चिंता...
गुरुजी कहते है कि जब कोई साथ ना हो तब खुद से बात करना सीखो। जिंदगी में कई ऐसे पल...
नदियां कल कल बहती रहती पहाड़ों से उछल-कूद कर पत्थरों से टकराती बल खाती नाग-मोड़ तीव्र चाल ये चलती अपना...
बच्चे के जन्मते ही घर परिवार में खुशीयां छाई हजार। महिलाओं ने मंगळा गीत गाए चार, माँ फुली न समाई...
हर काम सोच समझकर करिये, कारण आपके हर शब्द ईश्वरीय रिकॉर्ड व्यवस्था (कुदरत में) में दर्ज होकर "ऐवरी ऐक्शन ईज...
