July 7, 2026

बारिश का कहर: तेज बारिश से वायनाड में भूस्खलन, सुरंग परियोजना स्थल पर तबाही

Landslides in Wayanad due to heavy rain; devastation at tunnel project site.

हादसा सीसीटीवी में कैद हुआ, इसमें दिख रहा है कि 7 जुलाई को सुबह 11 बजकर 15 मिनट पर तेज लहर टैंकर को अपने साथ ले गई।

वायनाड। केरल के वायनाड जिले में मंगलवार सुबह लगातार हो रही तेज बारिश के कारण बड़ा भूस्खलन हो गया। हादसे में एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई, जबकि आठ लोग घायल हुए हैं। कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका के बीच बचाव अभियान लगातार जारी है। घटना कल्लाडी स्थित मीनाक्षी पुल के निकट उस स्थान पर हुई, जहां मलप्पुरम-वायनाड सुरंग परियोजना का निर्माण कार्य चल रहा है।

जानकारी के अनुसार, सुरंग की खुदाई से निकाली गई मिट्टी को परियोजना स्थल के बाहर एकत्र किया गया था। लगातार बारिश के कारण मिट्टी का विशाल ढेर अचानक खिसक गया। इसके चलते कई पेड़ उखड़ गए, बैरिकेड बह गए और आसपास का क्षेत्र मलबे से भर गया। घटना का सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सुबह लगभग 11 बजकर 15 मिनट पर सुरंग क्षेत्र से तेज बहाव के साथ आया मलबा एक टैंकर को तिनके की तरह बहाकर ले जाता दिखाई दे रहा है। इस दौरान दो लोग मलबे में फंस गए।

पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) तथा स्थानीय प्रशासन की टीमें राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मलबे को हटाने के लिए भारी मशीनों की आवश्यकता है। अधिकारियों के अनुसार, लगातार वर्षा को देखते हुए सोमवार से ही सुरंग निर्माण कार्य एहतियात के तौर पर रोक दिया गया था।

मलप्पुरम-वायनाड सुरंग परियोजना के तहत मलप्पुरम और वायनाड को लगभग 8.17 किलोमीटर लंबी सुरंग के माध्यम से जोड़ने की योजना है। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 2,100 से 2,200 करोड़ रुपये बताई गई है।

वायनाड पश्चिमी घाट के अत्यधिक संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की वर्ष 2021 की रिपोर्ट के अनुसार केरल का लगभग 43 प्रतिशत क्षेत्र भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील है, जबकि वायनाड की लगभग 51 प्रतिशत भूमि पहाड़ी ढलानों पर स्थित होने के कारण यहां भूस्खलन का खतरा अधिक रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारी वर्षा, ढलानदार भूभाग तथा निर्माण गतिविधियां इस जोखिम को और बढ़ा देती हैं।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में वायनाड में हुए भीषण भूस्खलन में 400 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। इससे पहले वर्ष 2019 में भी भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में 17 लोगों की मृत्यु हुई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता और वैज्ञानिक निगरानी अत्यंत आवश्यक है।

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