डॉ. सुमित सिन्हा: कीहोल न्यूरोसर्जरी से ब्रेन इलाज में आई नई क्रांति
डायरेक्टर डॉ. (प्रो.) सुमित सिन्हा।
डायरेक्टर डॉ. (प्रो.) सुमित सिन्हा।
नई दिल्ली, अजीत कुमार। आधुनिक न्यूरोसर्जरी में मिनिमली इनवेसिव कीहोल और एंडोस्कोपिक तकनीकों ने ब्रेन और स्पाइन से जुड़ी जटिल बीमारियों के इलाज को अधिक सुरक्षित और सटीक बना दिया है। इन तकनीकों की मदद से सर्जन ब्रेन के संवेदनशील हिस्सों तक कम से कम कट और नुकसान के साथ पहुंच पाते हैं, जिससे मरीजों को कम दर्द और तेजी से रिकवरी का लाभ मिलता है।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, द्वारका के रोबोटिक्स एवं मिनिमली इनवेसिव न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. (प्रो.) सुमित सिन्हा ने बताया कि कीहोल न्यूरोसर्जरी में खोपड़ी में छोटा सा छेद बनाकर माइक्रोस्कोप, एंडोस्कोप और नेविगेशन सिस्टम की सहायता से सर्जरी की जाती है। इससे आसपास के स्वस्थ ब्रेन टिश्यू सुरक्षित रहते हैं और इलाज अधिक सटीक होता है।
उन्होंने बताया कि एंडोस्कोपिक तकनीक में कैमरे और लाइट लगी पतली ट्यूब के जरिए ब्रेन के गहरे हिस्सों तक पहुंचा जाता है। यह तकनीक पिट्यूटरी ट्यूमर, हाइड्रोसेफेलस, स्कल बेस ट्यूमर और ब्रेन सिस्ट जैसी बीमारियों में बेहद प्रभावी साबित हो रही है। कई मामलों में सर्जरी नाक के रास्ते की जाती है, जिससे बाहरी कट लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
डॉ. सुमित के अनुसार इन आधुनिक तकनीकों से संक्रमण का खतरा कम होता है, अस्पताल में कम समय रुकना पड़ता है और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट पाता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक उपकरणों और अनुभवी सर्जिकल टीम की मदद से अब ब्रेन सर्जरी पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और प्रभावी हो गई है।