सोनीपत: खूबडू विद्यालय में मेधावी विद्यार्थियों को साइकिलें भेंट की
सोनीपत: मेघावी छात्रों को सम्मानित करते हुए समाज सेवी वीरेंद्र धनखड़ व अन्य ग्रामीण।
- मेहनत करो, सपने देखो और सरकार करो: वीरेंद्र धनखड़
सोनीपत, अजीत कुमार। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, खूबडू में मेधावी छात्र-छात्राओं के सम्मान में मंगलवार को प्रेरणादायक समाजसेवी वीरेंद्र धनखड़ ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को साइकिल भेंट कर सम्मानित किया। समारोह में विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और ग्रामीणों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। विद्यालय का परिणाम शत-प्रतिशत रहा।
दसवीं कक्षा प्रीत – प्रथम स्थान (426/500, 85.2%) मानकी – द्वितीय स्थान (408/500, 81.6%) बारहवीं कक्षा
मनीष – प्रथम स्थान (422/500, 84.4%) अक्षय – द्वितीय स्थान (408/500, 81.6%) इन सभी विद्यार्थियों को वीरेंद्र धनखड़ ने साइकिल भेंट कर सम्मानित किया। समारोह में शॉट पुट प्रतियोगिता में पदक जीतने पर अंशु धनखड़ को भी विशेष सम्मान दिया गया। समाजसेवी वीरेंद्र धनखड़ ने कहा कि मेहनत, अनुशासन और बड़े सपनों के साथ आगे बढ़ेंगे तो सफलता निश्चित है। शिक्षा ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।
कार्यक्रम में पूर्व अध्यक्ष जगबीर धनखड़, पूर्व सरपंच ओमप्रकाश, आजाद, बिजेंद्र धनखड़ और सुमित धनखड़ विशेष रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों ने विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि मेहनत करो, सपने देखो और सरकार करो । ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे भी देश का भविष्य हैं, इसलिए शिक्षा के माध्यम से बड़े लक्ष्य तय करें और उन्हें हासिल करें। विद्यालय इंचार्ज रेनू ने कहा कि नियमित पढ़ाई, अनुशासन और अच्छे संस्कार ही विद्यार्थियों को ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं। सरोज बाला, सविता, सुनीता देवी, सुमित्रा, अंजू, कृष्ण सोलंकी, बिजेंद्र कुमार बैनीवाल, रविंद्र पहल (पीटीआई), नितिन खत्री, रामनिवास, प्रदीप यादव, रविंद्र धनखड़, भूपेंद्र मालिक, राजेश खोखर और विनीत श्योराण ने विद्यार्थियों को निरंतर मेहनत और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। समारोह में विद्यार्थियों के अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और उन्होंने विद्यालय के शिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए बच्चों की सफलता पर गर्व व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन रविंद्र पहल ने किया और अंत में सभी को मिठाई वितरित की गई।
यह आयोजन मेधावी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना और पूरे विद्यालय में पढ़ाई के प्रति नया उत्साह भर गया। ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में यह पहल एक प्रेरक उदाहरण साबित हुई।
