सोनीपत: रोहट पीएचसी निर्माण में घटिया पानी, सैपल फेल गुणवत्ता पर उठे सवाल
सोनीपत: रोहट पीएचसी निर्माण में अनुपयुक्त पानी का इस्तेमाल होने से बिल्डिंग मियाद समय से पहले गिर गई।
सोनीपत, अजीत कुमार। सोनीपत जिले के रोहट स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) के निर्माण में गुणवत्ता से जुड़ी गंभीर लापरवाही सामने आई है। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार निर्माण के दौरान आरसीसी कार्य में इस्तेमाल किए गए पानी के नमूने तय मानकों पर खरे नहीं उतरे थे। जांच में पानी को भवन निर्माण के लिए अनुपयुक्त पाया गया था। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहा, जिससे भवन की मजबूती और उसकी आयु पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई गई थी।

लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़क) मुख्यालय के 17 मई 2010 के आदेश के अनुसार विभिन्न निर्माण स्थलों से पानी के नमूने लेकर उनकी जांच कराई गई थी। रोहट पीएचसी में उपयोग किए गए पानी की रिपोर्ट में कई मानक तय सीमा से बाहर मिले। जांच के अनुसार पानी का पीएच आठ, घुले हुए ठोस पदार्थ 3100 मिलीग्राम प्रति लीटर, सल्फेट 460 मिलीग्राम प्रति लीटर तथा क्लोराइड 650मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे पानी के उपयोग से कंक्रीट की मजबूती कम हो सकती है और लोहे में जंग लगने का खतरा बढ़ जाता है।
विभागीय आदेश में स्पष्ट किया गया था कि निर्माण कार्यों में केवल भारतीय मानक आईएस-४५६ के अनुरूप पानी का ही उपयोग किया जाए। इस मानक के विपरीत पानी के उपयोग से भवन की संभावित आयु लगभग सौ वर्ष के बजाय केवल पंद्रह से बीस वर्ष तक सीमित रह सकती है। मामले को गंभीर मानते हुए विभाग ने तत्कालीन जूनियर इंजीनियर को जिम्मेदार ठहराकर निलंबित किया था। विभागीय रिकॉर्ड में अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी दर्ज की गई थी। बाद में रोहट पीएचसी की इमारत समय से पहले गिरने के बाद इस पुराने मामले ने फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि यदि उस समय तकनीकी खामियों को दूर कर भवन का पुनर्निर्माण कराया जाता, तो यह स्थिति टाली जा सकती थी।
विभाग का कहना है कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता मानकों का पालन अनिवार्य है। किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर नियमानुसार जांच कर जिम्मेदारी तय की जाती है और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है।
आदेश के अनुसार इस निर्माण कार्य की जिम्मेदारी जूनियर इंजीनियर (जेई) अनिल चहल तथा एसडीई अश्वनी कुमार के पास थी। विभागीय जांच में अनिल चहल को इस लापरवाही के लिए उत्तरदायी पाया गया था। इसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश पीडब्ल्यूडी (बी एंड आर) विभाग की ओर से जारी किया गया है।
