रक्षा मंत्रालय: सीबीआई जांच में रक्षा निर्माणी का करोड़ों का टेंडर घोटाला उजागर
नई दिल्ली। रक्षा मंत्रालय के अधीन उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के हजरतपुर स्थित आयुध उपस्कर निर्माणी में करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार का मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की जांच में सामने आया है। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा गाजियाबाद ने तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक अमित सिंह, कनिष्ठ कार्य प्रबंधकों, कई ठेकेदारों तथा कथित छद्म कंपनियों के संचालकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप में चार अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की हैं। इन मामलों में कुल दस लोगों को आरोपी बनाया गया है। एक मामले में फिरोजाबाद के उद्योगपति राजकुमार मित्तल का नाम भी शामिल है।
जांच एजेंसी के अनुसार वर्ष 2022 से 2025 के बीच नियमों की अनदेखी कर लगभग 12 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडर कथित रूप से फर्जी कंपनियों को दिए गए। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में सरकारी कंप्यूटर प्रणाली और इंटरनेट प्रोटोकॉल पते का दुरुपयोग कर चुनिंदा कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया। इसके बदले संबंधित अधिकारियों को कथित रूप से रिश्वत, दक्षिण कोरिया की हवाई यात्रा के टिकट तथा उनके परिजनों के खातों में धनराशि हस्तांतरित की गई।
पहले मामले में बिना आवश्यक तकनीकी योग्यता और कथित फर्जी अनुभव प्रमाणपत्रों के आधार पर एक कंपनी को लगभग 5.67 करोड़ रुपये के 50 टेंडर दिए जाने का आरोप है। जांच में यह भी सामने आया कि टेंडर भरने के लिए कारखाने के सरकारी कंप्यूटरों का उपयोग किया गया। दूसरे मामले में लगभग 5.26 करोड़ रुपये के टेंडर एक ऐसी कंपनी को दिए जाने का आरोप है, जिसका पंजीकृत पता जांच के दौरान वास्तविक औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ा नहीं मिला।
तीसरे मामले में स्थानीय क्रय समिति के माध्यम से कथित फर्जी मूल्य उद्धरण के आधार पर दो कंपनियों को कई टेंडर दिए जाने का आरोप है। जांच के अनुसार ये कंपनियां एक ही व्यक्ति द्वारा अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर संचालित की जा रही थीं। चौथे मामले में कारखाने के प्रतिबंधित सुरक्षा क्षेत्र के निकट कथित रूप से रिश्वत लेकर अवैध निर्माण की अनुमति देने का आरोप लगाया गया है।
सीबीआई का आरोप है कि तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक, कुछ अधिकारियों और निजी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने मिलकर सरकारी नियमों की अनदेखी करते हुए टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताएं कीं। जांच में कथित रिश्वत, धन हस्तांतरण, फर्जी दस्तावेजों के उपयोग तथा टेंडर शर्तों में बदलाव जैसे पहलुओं की भी जांच की जा रही है। एजेंसी ने संबंधित दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य अपने कब्जे में लेकर जांच आगे बढ़ा दी है।
आयुध उपस्कर निर्माणी भारतीय सशस्त्र बलों के लिए पैराशूट, छलावरण जाल, सुरक्षा उपकरण तथा अन्य रक्षा सामग्री का निर्माण करती है। यह इकाई लंबे समय से रक्षा उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। सीबीआई का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
