सोनीपत: टैक्सी चालक की बेटी हिंद केसरी बनी गोल्डन गर्ल काजल
सोनीपत: हिंन्द केसरी काजल अपने चाचा के साथ।
- 16 साल की उम्र में 16 बार बन चुकी भारत केसरी
- महाराष्ट्र में हुई नेशनल प्रतियोगिता में कार और दो किलो चांदी की गदा मिली
सोनीपत, अजीत कुमार। सोनीपत जिले की युवा पहलवान काजल ने एक बार फिर अपने दमदार प्रदर्शन से पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। महाराष्ट्र में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में काजल ने 65 प्लस भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर हिंद केसरी का प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम कर लिया। उनकी इस बड़ी सफलता से सोनीपत सहित पूरे हरियाणा में खुशी का माहौल है।
इस प्रतियोगिता में देशभर से महिला पहलवानों ने हिस्सा लिया। 65 प्लस भार वर्ग में काजल ने हर मुकाबले में अपना दबदबा बनाए रखा और लगातार जीत दर्ज करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। बताया गया कि प्रतियोगिता में चार सौ से अधिक खिलाड़ी शामिल हुए थे। काजल ने अपने अनुभव, आत्मविश्वास और शानदार तकनीक के दम पर 25 प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़कर यह उपलब्धि हासिल की।

इस जीत पर उन्हें इनाम के तौर पर एक कार और दो किलो चांदी की गदा देकर सम्मानित किया गया। सोनीपत के सेक्टर 23 में पहुंचने पर मंगलवार को उनका जोरदार स्वागत हुआ। मेयर राजीव जैन ने उन्हें सम्मानित कर बधाई दी और मिठाई खिलाकर खुशी साझा की। शहर में खेल प्रेमियों ने इसे गर्व का पल बताया।
काजल पहले भी कई बार भारत केसरी बन चुकी हैं। हिंद केसरी बनने के बाद उनकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत हो गई है। काजल का कहना है कि अब उनका सपना ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। वह लगातार मेहनत कर रही हैं और आने वाले वर्षों में भारत का झंडा दुनिया के सबसे बड़े मंच पर लहराना चाहती हैं। परिवार और कोच भी उनकी तैयारी में पूरा सहयोग दे रहे हैं। काजल इससे पहले बुल्गारिया के समोकोव में आयोजित अंडर 20 विश्व चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। उन्होंने 72 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में चीन की यूकी लियू को 8-6 से हराकर विश्व खिताब जीता था। इससे पहले वर्ष 2024 में अंडर 17 विश्व चैंपियनशिप में उन्हांेने 69 किलोग्राम वर्ग में यूक्रेन की ओलेक सांद्रा रिबाक को 9-2 से हराकर स्वर्ण पदक हासिल किया था। लगातार दो विश्व खिताब जीतकर काजल ने अपनी मजबूत पहचान बना ली है।
सोनीपत के गांव लाठ में जन्मी काजल साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिता टैक्सी चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं और बेटी के सपनों को पूरा करने में पूरा सहयोग दे रहे हैं। काजल ने मात्र नौ साल की उम्र में कुश्ती शुरू की थी। उनके चाचा कृष्ण पहलवान की प्रेरणा ने उन्हें अखाड़े तक पहुंचाया।
कम उम्र में ही काजल ने कई रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए हैं। महज सोलह साल की उम्र में वह सोलह बार भारत केसरी बन चुकी हैं। गांव लाठ में उनकी जीत पर खुशी की लहर है और स्वागत की तैयारियां चल रही हैं। खेल प्रेमियों को उम्मीद है कि काजल आने वाले समय में ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रचेंगी।
