July 14, 2026

महंगाई: 44 महीने के उच्चतम स्तर पर थोक महंगाई, महंगे हुए रोजमर्रा के सामान

Wholesale inflation at a 44-month high; everyday items become costlier.

नई दिल्ली। देश में महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। जून 2026 में थोक महंगाई दर बढ़कर 9.87 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो मई में 9.68 प्रतिशत थी। यह पिछले 44 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले सितंबर 2022 में थोक महंगाई 10.70 प्रतिशत दर्ज की गई थी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के ताजा आंकड़े जारी किए।

मंत्रालय के अनुसार, थोक महंगाई बढ़ने का मुख्य कारण रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं और खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी है। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव का असर जारी रहा, तो आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।

आंकड़ों के अनुसार, प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई दर 4.99 प्रतिशत से बढ़कर 7.00 प्रतिशत हो गई। वहीं खाद्य वस्तुओं की महंगाई 4.49 प्रतिशत से बढ़कर 6.14 प्रतिशत पहुंच गई। हालांकि ईंधन एवं बिजली की थोक महंगाई 30.33 प्रतिशत से घटकर 27.41 प्रतिशत रही, जबकि विनिर्मित उत्पादों की महंगाई दर 7.48 प्रतिशत पर स्थिर रही।

इससे एक दिन पहले जारी खुदरा महंगाई के आंकड़ों में भी लगातार छठे महीने बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। जून में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.38 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो मई में 3.93 प्रतिशत थी। विशेषज्ञों का मानना है कि थोक महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहने पर कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल सकती हैं, जिससे आने वाले समय में खुदरा बाजार में भी कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

भारत में महंगाई का आकलन दो प्रमुख सूचकांकों—थोक मूल्य सूचकांक और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक—के आधार पर किया जाता है। दोनों ही संकेतक देश की आर्थिक स्थिति और आम उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले महंगाई के प्रभाव को दर्शाते हैं।

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