मथुरा: हनीमून छोड़ 12 ज्योतिर्लिंगों की पदयात्रा पर निकला सिंधी नवदंपति, मथुरा में हुआ भव्य स्वागत
मथुरा, किशोर इसरानी। निलेश राजानी एवं सोनिया राजानी एक नवविवाहित दंपत्ति हैं, जो पूरे भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शनों के लिए पैदल यात्रा पर निकले हैं। यहां आकर उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मस्थान, वृंदावन, बरसाना के मंदिरों के दर्शन भी किए।
लाड़ी लोहाणा सिंधी पंचायत के प्रदेश महामंत्री रामचंद्र खत्री, सिंधी जनरल पंचायत के वरिष्ठ मंत्री गुरूमुखदास गंगवानी, कार्यकर्ता मनोज खत्री तथा भारतीय सिंधु सभा महिला विंग की प्रदेश महामंत्री कोकल भाटिया, मैनेजर प्रकाश आसवानी के नेतृत्व में सिंधीजनों ने मथुरा के डेम्पीयर नगर एल पी नागर रोड स्थित गोदड़ी वाला धाम में आए हुए दम्पत्ति यात्रियों का भावपूर्ण स्वागत किया।
मीडिया प्रभारी किशोर इसरानी ने बताया कि सिंधी समाज के अहमदाबाद निवासी नवयुगल ने विवाह उपरांत हनीमून का नहीं, बल्कि सवा साल चलने वाली, भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों की, लगभग 12 हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा का संकल्प लिया। 23 जुलाई 2025 से शुरू हुई, अब तक 9 महीनों की यात्रा में नवयुगल ने 8 ज्योतिर्लिंग, केदारनाथ, काशी विश्वनाथ, बैद्यनाथ, ओंकारेश्वर, महाकालेश्वर, नागेश्वर, सोमनाथ, त्र्यंबकेश्वर के दर्शन कर लिए है, जबकि चार ज्योतिर्लिंग, घृष्णेश्वर, भीमाशंकर, मल्लिकार्जुन, रामेश्वरम के दर्शन करना बाकी है, इस बीच उन्होंने 175 सिंधी परिवारों में निवास कर, 125 सिंधी पंचायतों से संपर्क कर सनातन संस्कृति के प्रचार पर बल देते हुए 5 शक्ति पीठों तथा 150 से ज्यादा झूलेलाल मंदिरों के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
लाड़ी लोहाणा सिंधी पंचायत के प्रदेश महामंत्री रामचंद्र खत्री ने इंडियन बुक ऑफ रिकॉर्ड, वर्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज करा चुके भारत के पहले नवविवाहित जोड़े की प्रशंसा करते हुए कहा कि जो लोग यह मानते हैं कि सिंधी समाज हिंदू या सनातनी नहीं है, उनको निलेश राजानी एवं सोनिया राजानी ने साकारात्मक संदेश देने का सराहनीय प्रयास किया है। आज की पीढ़ी को राजानी दम्पत्ति से प्रेरणा लेनी चाहिए।
सिंधी जनरल पंचायत के वरिष्ठ मंत्री गुरूमुखदास गंगवानी ने बताया कि 43 डिग्री तपिश में आस्था की मिसाल बने सिंधी दम्पत्ति गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों से होते हुए मथुरा आए, लेकिन लंबे सफर की थकान के बावजूद उनके हौसले में कोई कमी नहीं दिखी, उनके चेहरे पर संतोष और अपने लक्ष्य को पूरा करने का विश्वास साफ नजर आया। यह यात्रा कई मायनों में खास है। एक ओर यह धार्मिक आस्था से जुड़ी है, तो दूसरी ओर यह समाज को जागरूक करने का भी माध्यम बन रही है। दंपती का कहना है कि नई पीढ़ी के बहुत से लोगों को 12 ज्योतिर्लिंगों के बारे में जानकारी नहीं है, ऐसे में वे लोगों को इसके महत्व के बारे में बताते हैं और धर्म के प्रति जागरूक करते हैं।
भारतीय सिंधु सभा महिला विंग की प्रदेश महामंत्री कोकल भाटिया ने कहा कि इतिहास के संदर्भ में देखें तो 1947 के विभाजन के समय सिंधी समाज को अपना मूल स्थान छोड़कर भारत आना पड़ा था। उस दौर में समाज ने अपनी संस्कृति और धर्म को बचाकर रखने के लिए कई संघर्ष किए। आज उसी समाज के एक युवा दंपती द्वारा इतनी कठिन पदयात्रा करना यह दर्शाता है कि उनकी जड़ें सनातन धर्म से कितनी गहराई से जुड़ी हुई हैं। निलेश और सोनिया राजानी की यह यात्रा आज के युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन रही है, जहां आधुनिक जीवन में सुविधाएं बढ़ गई हैं, वहीं यह दंपती हजारों किलोमीटर पैदल चलकर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। यह यात्रा संदेश देती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी रास्ता मुश्किल नहीं होता। मथुरा में हुआ यह स्वागत केवल एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उस जज्बे का सम्मान था, जो इस दंपती ने अपने भीतर जिंदा रखा है।
