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The search for money

कवि दलीचंद जांगिड सातारा वालों की कलम से: जमीन से मंहगी दवा हो गई

जमीन से मंहगी दवा हो गई                   ................................................................................................... हाथ में लिये कुल्हाड़ी   धना धन पेड़ असंख्य  काट रही है दुनिया सारी          हाईवे…
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कवि दलीचंद जांगिड सातारा वालों की कलम से: गुरु वट वृक्ष है समाज का

गुरु ब्रह्मा , गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा गुरु साक्षात ब्रह्म , तस्मै श्री गुरुवे नम: अत: गुरु का स्थान सर्वोपरि है समाज में......... गुरुकुल यह प्राचीन काल से चली आ रही विद्या हासिल करने का केन्द्र रहा है, जहा राजकुमार के रुप मे…
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कवि दलीचंद जांगिड सातारा वालों की कलम से: रुपयों की खोज…?

ये कैसा जमाना आया ---------------------- वो भी एक जमाना था जब पूर्वजों को काम के बदले में अनाज लेते देखा था हमने हाथ, वेथ, चपटी चार अंगुली यही नाप का पेमाना था उनका सुख चैन के साथ पुरा परिवार था रुपया पैसा कम था पर सुख से वे सब…
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