देश के भविष्य से खिलवाड़ करता नीट: नीट पुनर्परीक्षा के दबाव ने छीनी दो और छात्रों की जिंदगी, देशभर में बढ़ी चिंता
अनुकीर्तना कोयंबटूर के कोवईपुदुर स्थित पार्क टाउन की रहने वाली थी।
कोयंबटूर, जीजेडी न्यूज। तमिलनाडु के कोयंबटूर और गुजरात के अहमदाबाद से नीट (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) की तैयारी कर रहे दो छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर दिया है। दोनों मामलों के सामने आने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते दबाव और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
कोयंबटूर में 19 वर्षीय छात्रा अनुकीर्तना ने बुधवार सुबह कथित रूप से विषाक्त पदार्थ का सेवन कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। बताया जा रहा है कि छात्रा ने आत्मघाती कदम उठाने से पहले अपने चाचा और अन्य करीबी रिश्तेदारों को संदेश भेजा था। संदेश में उसने लिखा कि उसने नीट परीक्षा दी थी और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश की उम्मीद कर रही थी, लेकिन परीक्षा रद्द होने के बाद उसे दोबारा परीक्षा देने का डर सताने लगा था। उसने यह भी लिखा कि उसके पिता ने उसकी पढ़ाई पर काफी धन खर्च किया है और वह उनके सामने स्वयं को असहाय महसूस कर रही है।
अनुकीर्तना कोयंबटूर के कोवईपुदुर क्षेत्र की रहने वाली थी। उसका सपना चिकित्सक बनकर गरीबों की सेवा करना था। परिजनों के अनुसार पुनर्परीक्षा की घोषणा के बाद वह मानसिक रूप से काफी तनाव में थी। रिश्तेदारों को संदेश मिलने के बाद जब परिजन उसके घर पहुंचे तो वह कमरे में अचेत अवस्था में मिली। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
दूसरी ओर गुजरात के अहमदाबाद के न्यू रानीप क्षेत्र में 17 वर्षीय एक छात्र ने बहुमंजिला इमारत की छठी मंजिल से छलांग लगाकर जान दे दी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वह भी नीट परीक्षा की तैयारी कर रहा था। हालांकि आत्महत्या के कारणों का अभी स्पष्ट खुलासा नहीं हो सका है।
पिछले दो दिनों में नीट अभ्यर्थियों की आत्महत्या के यह चौथा और पांचवां मामला बताया जा रहा है। इससे पहले देहरादून और लखनऊ में भी दो छात्रों ने आत्मघाती कदम उठाया था। परीक्षा रद्द होने और पुनर्परीक्षा की घोषणा के बाद देशभर में छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।
नीट-यूजी 2026 परीक्षा तीन मई को आयोजित की गई थी, लेकिन प्रश्नपत्र लीक और अनियमितताओं के आरोपों के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने परीक्षा रद्द कर दी। इसके बाद 21 जून को पुनर्परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया। इस घटनाक्रम ने लाखों अभ्यर्थियों और उनके परिवारों को मानसिक तनाव की स्थिति में ला दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को मानसिक और भावनात्मक सहयोग उपलब्ध कराना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, ताकि ऐसे दुखद घटनाक्रमों को रोका जा सके।
