August 14, 2026

पेपर लीक पर सख्ती: पीएम मोदी ने दोषियों के लिए किया फास्ट ट्रैक कोर्ट का ऐलान

Crackdown on paper leaks: Fast-track courts announced for the guilty.

पीएम मोदी।

नई दिल्ली। देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा ऐलान किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक के दोषियों को शीघ्र और कड़ी सजा दिलाने के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पेपर लीक के मुद्दे पर विभिन्न संगठनों और विपक्षी दलों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि देश के युवाओं का हित और उनका उज्ज्वल भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा।

देश में अब तक पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई सामान्य अदालतों में होती रही है, जिसके कारण फैसलों में वर्षों लग जाते थे। अब फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन से ऐसे मामलों का शीघ्र निपटारा संभव हो सकेगा। भारत में फास्ट ट्रैक अदालतों की शुरुआत वर्ष 2000 में हुई थी। केंद्र सरकार के अनुसार, वर्ष 2019 से 2025 के बीच दुष्कर्म और बाल संरक्षण कानून से जुड़े तीन लाख से अधिक मामलों का इन अदालतों के माध्यम से निपटारा किया जा चुका है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले भी कहा था कि नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक की जानकारी मिलते ही सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया और छात्रों के हित में आवश्यक निर्णय लिए। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल दोषियों को दंडित करना ही नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोकना भी है।

इस बीच केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष को उन राज्यों में भी जवाब देना चाहिए, जहां उनकी सरकारों के दौरान पेपर लीक की घटनाएं हुईं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है।

सरकार का मानना है कि फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना से न केवल दोषियों को शीघ्र सजा मिलेगी, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले करोड़ों युवाओं का भरोसा भी मजबूत होगा।

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