June 27, 2026

आठवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर पर तेज हुई चर्चा: जानिए कितना बढ़ सकता है कर्मचारियों का वेतन

Discussions on the fitment factor for the 8th Pay Commission intensify; find out how much employee salaries could increase.

आठवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर पर तेज हुई चर्चा।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच आठवें वेतन आयोग को लेकर उत्सुकता लगातार बढ़ती जा रही है। आयोग की बैठकों के साथ अब सबसे अधिक चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है। विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने आयोग के समक्ष अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव रखा है। अधिकांश संगठनों ने तीन से अधिक फिटमेंट फैक्टर की मांग की है, जबकि हाल ही में दो दशमलव एक शून्य फिटमेंट फैक्टर को लेकर भी व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

यह चर्चा आठवें वेतन आयोग की 22 और 23 जून को लखनऊ में हुई बैठक के बाद तेज हुई। कर्मचारी संगठनों के बीच इस बात पर मंथन शुरू हुआ कि यदि वर्तमान महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता और परिवहन भत्ते को आधार बनाया जाए तो फिटमेंट फैक्टर दो दशमलव एक शून्य तक पहुंच सकता है।

अखिल भारतीय नई पेंशन प्रणाली कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल का कहना है कि यदि 31 दिसंबर 2026 तक लागू महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता और परिवहन भत्ता को शामिल किया जाए तथा किसी अतिरिक्त वृद्धि कारक को न जोड़ा जाए, तब भी फिटमेंट फैक्टर लगभग दो दशमलव एक शून्य बन सकता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यदि परिवार इकाई का मान तीन से बढ़ाकर चार दशमलव चार किया जाता है तो यह आंकड़ा दो दशमलव शून्य पांच तक पहुंच सकता है।

डॉ. पटेल ने उदाहरण देते हुए बताया कि प्रथम वेतन स्तर के कर्मचारी का वर्तमान मूल वेतन अठारह हजार रुपये है। महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता और परिवहन भत्ता जोड़ने पर कुल वेतन सैंतीस हजार अस्सी रुपये होता है। इस राशि को मूल वेतन से विभाजित करने पर फिटमेंट फैक्टर लगभग दो दशमलव शून्य छह आता है, जिसे पूर्णांक में दो दशमलव एक शून्य माना जा सकता है।

यदि आयोग अपनी सिफारिशों में दो दशमलव एक शून्य फिटमेंट फैक्टर को शामिल करता है, तो प्रथम वेतन स्तर के कर्मचारी का मूल वेतन अठारह हजार रुपये से बढ़कर सैंतीस हजार आठ सौ रुपये हो सकता है। इसी प्रकार उच्च वेतन स्तर के कर्मचारियों के वेतन में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अंतिम निर्णय आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार की स्वीकृति के बाद ही स्पष्ट होगा।

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