July 16, 2026

वरूणावतार भगवान झूलेलाल का चालिहा महोत्सव शुरू:  सिंधी समाज द्वारा लगातार 40 दिन तक होंगे धार्मिक अनुष्ठान

Chalihā Mahotsav of Lord Jhulelal—the incarnation of Varuna—begins; the Sindhi community will conduct religious rituals for 40 consecutive days.

मथुरा, किशोर इसरानी। लगातार 40 दिन तक चलने वाले वरूणावतार भगवान झूलेलाल का चालिहा महोत्सव शुरू हो गया है। अब सिंधी समाज द्वारा लगातार 40 दिन पूजा, आरती, व्रत संग धार्मिक अनुष्ठान होते रहेंगे। प्रतिदिन चालिहा पर्व की धूम रहेगी। हर दिन सुबह 9 बजे तथा शाम 5 बजे आरती पूजन होगा। लगातार चालिस दिन सिंधी समाज का हर परिवार वरूणावतार झूलेलाल की भक्ति में मगन दिखेगा। 

Chalihā Mahotsav of Lord Jhulelal—the incarnation of Varuna—begins; the Sindhi community will conduct religious rituals for 40 consecutive days.

गुरूवार सुबह गोवर्धन रोड स्थित कृष्णा आर्चिड के बड़े मंदिर से भगवान झूलेलाल जी की प्रतिमा सर पर रखकर कॉलोनी में कलश यात्रा निकाली गई, तदोपरांत सिंधी महाराज स्वामी पंडित मोहनलाल शर्मा के निवास स्थान पर सजाए गए दरबार में भगवान झूलेलाल जी की स्थापना संग ही ज्योत प्रज्वलित करके आरती पूजन वंदन किया गया, वहीं भगवान झूलेलाल के जयकारों एवं तरानों में हर कोई डूबा दिखा। लगातार चालिस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने वाले भक्तों ने व्रत करने का संकल्प लिया वहीं सिंधीजनों ने दर्शन कर पुण्य कमाया। 

मथुरा शहर की सभी सिंधी पंचायत एवं संगठनों के पदाधिकारियों एवं तमाम सिंधीजनों ने सजाए गए भगवान झूलेलाल के मंदिर के दर्शनों का लाभ प्राप्त किया तथा भगवान झूलेलाल जी की पूजा अर्चना तथा आरती वंदन कर अपने इष्टदेव से मानवकल्याण की प्रार्थना की। इसमें महिलाएं और बच्चे काफी उत्साहित दिखे।

Chalihā Mahotsav of Lord Jhulelal—the incarnation of Varuna—begins; the Sindhi community will conduct religious rituals for 40 consecutive days.

महाराज स्वामी पंडित मोहनलाल शर्मा ने बताया कि अखंडभारत के सिंध प्रांत के शासक मिर्खशाह ने सिंध में रहने वाले हिन्दु सिंधीजनों पर धर्मपरिवर्तन को लेकर लागतार अत्याचार की हदें पार कर दी थी, उत्पीड़न से परेशान बड़ी संख्या में सिंधी समुदाय सिंधु नदी के किनारे कई दिनों तक प्रार्थना करने लगे, तब खुश होकर जलदेवता ने वरूणावतार भगवान झूलेलाल के रूप में दर्शन देकर ने केवल अवतार लेने की बात कही, बल्कि उन्होने उस क्रूर शासक को सबक सिखाकर सिंधी समुदाय को उनके जल्म से मुक्ति भी दिलवाई। तब से हर साल प्राचीन सिंधु सभ्यता से जुड़ा चालिहा पर्व श्रद्धाभाव के साथ मनाया जाता है। 

मीडिया प्रभारी किशोर इसरानी ने बताया कि सिंधी समाज के लिए इन चालीस दिनों का काफी महत्व है। समाज के इस बड़े पर्व पर लगातार चालीस दिन झूलेलाल साई की प्रतीक के रूप में अखंड ज्योति की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। वरूणावतार भगवान झूलेलाल जी को सूर्य की ज्योति स्वरूप अवतार माना जाता है।

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