July 5, 2026

पासपोर्ट रैंकिंग में भारत फिर फिसला: भारतीय पासपोर्ट 125वें स्थान पर, पासपोर्ट रैंकिंग में भारत की गिरावट पर उठे सवाल

India slips again in passport rankings: Indian passport at 125th place; questions raised over the decline, and what will be the government's next strategy?

भारतीय पासपोर्ट 125वें स्थान पर, पासपोर्ट रैंकिंग में भारत की गिरावट पर उठे सवाल।

नई दिल्ली। ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में भारत की रैंकिंग में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई है। नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार भारतीय पासपोर्ट 125वें स्थान पर पहुंच गया है। वर्ष 2025 में भारत 124वें स्थान पर था, जबकि वर्ष 2021 से 2023 के बीच इसकी रैंकिंग 127वें स्थान पर रही। मामूली सुधार के बाद एक बार फिर आई गिरावट ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारत की वैश्विक यात्रा सुविधा बढ़ाने के प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार भारतीय पासपोर्ट धारकों को वर्तमान में केवल 26 देशों में बिना वीजा, वीजा ऑन अराइवल अथवा आसान प्रवेश की सुविधा उपलब्ध है। इनमें भूटान, नेपाल, जमैका, मकाऊ, फिलिस्तीन, ट्यूनीशिया, अंगोला और बारबाडोस जैसे देश शामिल हैं। दूसरी ओर अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, फ्रांस, चीन और संयुक्त अरब अमीरात सहित लगभग 88 देशों में जाने के लिए भारतीय नागरिकों को पहले से वीजा लेना अनिवार्य है।

वैश्विक रैंकिंग में भारतीय पासपोर्ट नामीबिया, फिलीपींस, मोरक्को और उज्बेकिस्तान जैसे देशों से पीछे है, जबकि अजरबैजान और किर्गिस्तान से आगे है। पड़ोसी देशों में चीन 104वें स्थान पर भारत से आगे है, जबकि बांग्लादेश 166वें, नेपाल 164वें और पाकिस्तान 188वें स्थान पर हैं।

ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में स्वीडन पहले, स्विट्जरलैंड दूसरे और फिनलैंड तीसरे स्थान पर रहे। शीर्ष 10 देशों में अधिकांश यूरोपीय देश शामिल हैं, जबकि अमेरिका और फ्रांस 11वें तथा कनाडा 13वें स्थान पर रहे।

सरकार पर उठते सवाल

पासपोर्ट रैंकिंग में गिरावट के बाद कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आ रहे हैं—

  • क्या भारत अधिक देशों के साथ वीजा-मुक्त यात्रा समझौते करने में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाया है?
  • जब भारत वैश्विक मंच पर अपनी बढ़ती भूमिका का दावा करता है, तब पासपोर्ट की रैंकिंग में सुधार क्यों नहीं दिख रहा?
  • क्या विदेश मंत्रालय की प्राथमिकताओं में भारतीय नागरिकों के लिए वीजा-मुक्त यात्रा सुविधाओं का विस्तार पर्याप्त गति से नहीं बढ़ रहा?
  • सरकार की क्या नई रणनीति है, जिससे भारतीय पासपोर्ट धारकों को अधिक देशों में बिना वीजा यात्रा की सुविधा मिल सके?
  • क्या आने वाले वर्षों में भारत अपनी कूटनीतिक पहल के जरिए पासपोर्ट की वैश्विक रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार ला पाएगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि पासपोर्ट की मजबूती केवल किसी देश की प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि उसके द्विपक्षीय संबंधों, वीजा समझौतों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से भी तय होती है। ऐसे में भारत के सामने चुनौती यह है कि अधिक से अधिक देशों के साथ वीजा-मुक्त या सरल यात्रा समझौते कर अपने नागरिकों को बेहतर वैश्विक यात्रा सुविधा उपलब्ध कराए।

About The Author