सोनीपत: योग और प्राकृतिक चिकित्सा स्वस्थ जीवनशैली के लिए अत्यंत प्रासंगिक :राज्य मंत्री वीरेंद्र
सोनीपत: उत्तराखंड हथकरघा बोर्ड के राज्य मंत्री वीरेंद्र सेमवाल को कुलपति अशोक कुमार स्मृति चिह्न देते हुए।
- राई खेल विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय योग प्राकृतिक चिकित्सा सम्मेलन शुरू
सोनीपत, अजीत कुमार। हरियाणा खेल विश्वविद्यालय, राई और नवयोगा इंस्टीट्यूट ऑफ योगा एंड नेचुरोपैथी (सूर्योदय सेवा समिति) के संयुक्त तत्वावधान में स्वास्थ्य, ज्ञान और विश्व शांति के लिए योग तथा प्राकृतिक चिकित्सा विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा सम्मेलन 2026 का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के बंसीलाल ऑडिटोरियम में किया गया। इसकी शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुई।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में उत्तराखंड हथकरघा बोर्ड के राज्य मंत्री वीरेंद्र सेमवाल मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने कहा कि योग और प्राकृतिक चिकित्सा भारत की प्राचीन तथा समृद्ध परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आज के समय में स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए इनकी प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि यदि योग और प्राकृतिक चिकित्सा को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जाए तो इससे न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि समाज में सकारात्मकता और संतुलन भी स्थापित किया जा सकता है।

मुख्य अतिथि ने कहा कि वर्तमान समय में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में योग और प्राकृतिक चिकित्सा लोगों को प्राकृतिक, सरल और प्रभावी स्वास्थ्य समाधान प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ज्ञान के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच बनते हैं, जिससे विश्व स्तर पर स्वास्थ्य, जागरूकता और शांति को बढ़ावा मिलता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा योग आयोग के अध्यक्ष डॉ. जयदीप आर्य ने की, जबकि हरियाणा खेल विश्वविद्यालय, राई के कुलपति अशोक कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सम्मेलन के सचिव प्रो. योगेश चंदर ने आयोजन की रूपरेखा और उद्देश्यों की जानकारी दी।
कुलपति अशोक कुमार ने कहा कि योग का वैश्विक प्रसार भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की देन है। आज पूरी दुनिया में योग लोकप्रिय हो चुका है और भारत इसकी मूल भूमि होने के कारण इसके प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने प्राकृतिक चिकित्सा को भी स्वस्थ जीवन का प्रभावी माध्यम बताया।
उद्घाटन सत्र में नवयोग मंत्र नामक सम्मेलन स्मारिका का विमोचन किया गया। इसके बाद आमंत्रित शोधपत्रों का प्रस्तुतिकरण हुआ, जिसमें देश-विदेश से आए विद्वानों और शोधकर्ताओं ने योग तथा प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की बड़ी संख्या में भागीदारी रही।
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