राज्यपाल आचार्य देवव्रत: सामाजिक सांस्कृतिक व्यवस्था का सुदृढ़ आधार है आर्य समाज
सोनीपत: राज्यपाल आचार्य देवव्रत आर्य समाज सम्मेलन के मंच पर मेहमानों के साथ।
- माहरा गांव आर्य महासम्मेलन, वैदिक धर्म व प्राकृतिक खेती संदेश
सोनीपत, अजीत कुमार। पंडित लेखराम शहीदी दिवस तथा भगत फूल सिंह जयंती के उपलक्ष्य में गांव माहरा में आर्य महासम्मेलन शुक्रवार को आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गुजरात तथा महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने मुख्य अतिथि कहा कि सामाजिक सांस्कृतिक व्यवस्था का आर्य समाज सुदृढ़ आधार है। सम्मेलन में बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान और आर्य समाज से जुड़े लोग उपस्थित रहे।
आचार्य देवव्रत ने अपने संबोधन में कहा कि देश की सामाजिक तथा सांस्कृतिक व्यवस्था को सुदृढ़ आधार देने में आर्य समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने बताया कि स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित आर्य समाज ने उस समय हिंदू समाज को संगठित करने तथा वेदों के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। आर्य समाज ने समाज में फैली कुरीतियों को समाप्त करने और सामाजिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद के विचारों से प्रेरित होकर मुंशीराम, जो बाद में स्वामी श्रद्धानंद के नाम से प्रसिद्ध हुए, ने हरिद्वार में गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना की। इसके माध्यम से गांव-गांव तक वैदिक विचारधारा का प्रचार-प्रसार हुआ और समाज में शिक्षा तथा जागरूकता का वातावरण बना।

पंडित लेखराम के जीवन का उल्लेख करते हुए आचार्य देवव्रत ने कहा कि उन्होंने धर्म परिवर्तन की ओर बढ़ रहे हिंदुओं को बचाने के लिए लगातार प्रयास किए और समाज सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। वहीं भगत फूल सिंह के बारे में उन्होंने बताया कि प्रारंभ में वे पटवारी थे, लेकिन आर्य समाज की शिक्षाओं से प्रभावित होकर उन्होंने गुरुकुल खानपुर की स्थापना की और विशेष रूप से महिला शिक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
आचार्य देवव्रत ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद, पंडित लेखराम तथा भगत फूल सिंह जैसे आर्य समाजियों ने हरियाणा के गांव-गांव तथा शहरों में वैदिक विचारों की अलख जगाई। उनके प्रयासों का ही परिणाम है कि खानपुर, भैंसवाल, मटिंडू और झज्जर सहित अनेक स्थानों पर आज भी गुरुकुल और शैक्षणिक संस्थान संचालित हो रहे हैं।
महासम्मेलन के दौरान उन्होंने प्राकृतिक खेती की महत्ता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यूरिया और डीएपी जैसे रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मानव शरीर में धीमा जहर पहुंच रहा है, जिससे कई प्रकार की दीर्घकालिक बीमारियां बढ़ रही हैं। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया ताकि पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों की रक्षा हो सके।
उन्होंने बताया कि कुरुक्षेत्र स्थित अपने 180 एकड़ के खेत में देशी गाय के गोबर और गौमूत्र से तैयार जीवामृत तथा धन जीवामृत के प्रयोग से प्राकृतिक खेती की जा रही है। इससे भूमि की उर्वरता और पैदावार में वृद्धि हो रही है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से प्राकृतिक खेती अपनाकर समाज और पर्यावरण की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।
