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Marwari poet Prakash Chand Jangid

कवि प्रकाश चन्द जांगिड़ “पिड़वा” पाली की मारवाड़ी कविता: हाचि-हाचि केऊ

हाचि-हाचि केऊ ने मौज में रेउ, छापाक ऊना-ऊना देउ, निंदा करे नाजोगा, ने के करे गाँव रा बोगा, ओपोरे तो मस्त रेणों ने नी करणी फालतू री देणों, करणीया करणी करे, वे तो उँदा-उँदा इज मरे, नेकी माते हालणियो, एडा कोम ने रोम ऊ डरे,…
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मारवाड़ी कवि प्रकाश चन्द जांगीड़ की कलम से गद्य,पद्य मिश्रण भाषा-मारवाड़ी: ओपी सुदार-सुदार करता-करता…

गद्य,पद्य मिश्रण भाषा-मारवाड़ी ओपी सुदार-सुदार करता-करता खुद विगड़ रिया हो। कीकर तो इउ! एक दूजा ने देखी-देखी ने बळो, बोलवाराफोडा पड़े, आवे जिउ ई अडिगा ठोक दो। कोई की केवा री कोशस करें, उण उ पेला उण री वात काट दो। विना समजिया…
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