June 22, 2026

हर बढ़ा हुआ प्रोस्टेट कैंसर नहीं होता: जानिए दोनों बीमारियों में क्या है बड़ा अंतर

Not every enlarged prostate is cancer: Know the major difference between the two conditions.

डॉ. विक्रम शाह बत्रा।

सोनीपत, अजीत कुमार। बढ़ती उम्र के साथ पुरुषों में प्रोस्टेट संबंधी समस्याएं आम होती जा रही हैं। पेशाब करने में कठिनाई, बार-बार पेशाब आना या रात में कई बार शौचालय जाना जैसे लक्षण दिखाई देने पर कई लोग यह आशंका पाल लेते हैं कि उन्हें प्रोस्टेट कैंसर हो गया है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि हर प्रोस्टेट समस्या कैंसर नहीं होती और प्रोस्टेट बढ़ने तथा प्रोस्टेट कैंसर के बीच महत्वपूर्ण अंतर होता है।

प्रोस्टेट पुरुषों में मूत्राशय के नीचे स्थित एक छोटी ग्रंथि होती है, जिसका मुख्य कार्य वीर्य द्रव का निर्माण करना है। उम्र बढ़ने के साथ इसमें होने वाले बदलावों के कारण मुख्य रूप से दो स्थितियां विकसित हो सकती हैं—बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (बीपीएच) अर्थात प्रोस्टेट का बढ़ना और प्रोस्टेट कैंसर।

मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, द्वारका के यूरोलॉजी, किडनी प्रत्यारोपण एवं यूरो ऑन्कोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. विक्रम शाह बत्रा के अनुसार बीपीएच एक गैर-कैंसरकारी स्थिति है, जो प्रायः 50 वर्ष की आयु के बाद देखने को मिलती है। इसमें प्रोस्टेट का आकार बढ़ जाता है और वह मूत्रमार्ग पर दबाव डालने लगता है, जिससे पेशाब का प्रवाह प्रभावित होता है। इसके कारण बार-बार पेशाब आना, पेशाब शुरू करने में कठिनाई, रात में बार-बार उठना तथा मूत्राशय पूरी तरह खाली न होने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

उन्होंने बताया कि दूसरी ओर प्रोस्टेट कैंसर तब विकसित होता है जब प्रोस्टेट की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। यह बीमारी शुरुआती चरणों में अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के रहती है, इसलिए नियमित जांच और स्क्रीनिंग का विशेष महत्व है। 50 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों तथा जिनके परिवार में इस बीमारी का इतिहास रहा हो, उन्हें समय-समय पर जांच अवश्य करानी चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार बीपीएच और प्रोस्टेट कैंसर दोनों की प्रकृति अलग-अलग होती है। बीपीएच सामान्यतः हार्मोनल परिवर्तनों के कारण होता है और प्रोस्टेट तक सीमित रहता है, जबकि कैंसर समय पर उपचार न मिलने पर शरीर के अन्य अंगों तक भी फैल सकता है। यह समझना जरूरी है कि प्रोस्टेट का बढ़ना कैंसर का कारण नहीं बनता, हालांकि कुछ लोगों में दोनों समस्याएं एक साथ मौजूद हो सकती हैं।

डॉ. बत्रा ने सलाह दी कि यदि पेशाब में खून आना, श्रोणि क्षेत्र में दर्द, बिना कारण वजन कम होना, लगातार थकान या पेशाब संबंधी गंभीर समस्याएं दिखाई दें तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच और सही उपचार से इन समस्याओं का प्रभावी प्रबंधन संभव है।

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