सोनीपत: बड़ी औद्योगिक क्षेत्र में नकली सिक्के बनाने की फैक्ट्री पकड़ी, पांच गिरफ्तार
सोनीपत: वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिनंदन सिंह नकली सिक्कों को बनाने वालों के बारे में बताते हुए ।
सोनीपत, अजीत कुमार। सोनीपत के बड़ी औद्योगिक क्षेत्र में 20 रुपये के नकली सिक्के बनाने वाली फैक्ट्री का उत्तर प्रदेश की सहारनपुर पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। फैक्ट्री में मशीन और डाई की मदद से रोजाना 10 से 12 हजार नकली सिक्के तैयार करने की क्षमता थी। तैयार सिक्कों को छोटे दुकानदारों के अलावा सरकारी शराब ठेकों और टोल टैक्स पर चलाने का आरोप है।
सहारनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिनंदन सिंह के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पंजाब निवासी उपकार लूथरा, हिमांशु, कुलदीप, संतोष चौरसिया और अनुराग पाल के रूप में हुई है। पांचों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक गिरोह का सरगना उपकार लूथरा वर्ष 2001 से सिक्के बनाने के काम से जुड़ा है। शुरुआत में वह सुनार का काम करता था और चांदी के सिक्के बनाता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात कुछ ऐसे लोगों से हुई, जिनके संपर्क में आने के बाद उसने नकली सिक्के बनाने का काम शुरू किया। मुनाफा होने पर उसने धीरे-धीरे अपना नेटवर्क खड़ा कर लिया। वह पहले जेल भी जा चुका है। तिहाड़ समेत अन्य जेलों में रहने के दौरान उसकी कुछ लोगों से मुलाकात हुई, जो बाद में उसके नेटवर्क से जुड़ गए।
पुलिस ने फैक्ट्री से 6,400 नकली सिक्के, करीब पांच लाख रुपये कीमत के अधबने सिक्के, छह मशीन, 64 डाई, फिनिशिंग उपकरण, सात रजिस्टर, चेकबुक, आठ मोबाइल और दो कार बरामद की हैं। पुलिस के अनुसार सिक्कों की फिनिशिंग इस तरह की जाती थी कि पहली नजर में उनकी पहचान करना मुश्किल हो। पूछताछ में आरोपियों ने दावा किया कि करीब छह महीने में 70 करोड़ रुपये से अधिक कीमत के नकली सिक्के बाजार में चलाए गए। पुलिस इस दावे की अलग से जांच कर रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि सिक्कों की आपूर्ति किन लोगों के जरिए अलग-अलग राज्यों में की जाती थी और नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार नकली सिक्कों की मांग बढ़ने के बाद गिरोह सहारनपुर में भी फैक्ट्री लगाने की तैयारी में था। इसके लिए जमीन और अन्य व्यवस्थाएं तलाश की जा रही थीं। नई फैक्ट्री शुरू होने से पहले ही पुलिस ने गिरोह का खुलासा कर दिया। अब पुलिस आरोपियों से पूछताछ के आधार पर उत्पादन, आपूर्ति और खपाने के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
