अल्फा रिव्यू: एक्शन में शानदार, कहानी में कमजोर पड़ी आलिया भट्ट की स्पाई फिल्म
अल्फा (2026) में आलिया भट्ट | यश राज फिल्म्स
मुंबई। यशराज फिल्म्स के लोकप्रिय स्पाई यूनिवर्स की नई फिल्म ‘अल्फा’ सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। निर्देशक शिव रवैल के निर्देशन में बनी इस फिल्म में पहली बार आलिया भट्ट मुख्य महिला जासूस की भूमिका में नजर आ रही हैं। फिल्म में उनके साथ शरवरी, बॉबी देओल, अनिल कपूर और विशेष भूमिका में ऋतिक रोशन भी दिखाई देते हैं। हालांकि दमदार कलाकारों की मौजूदगी और बड़े स्तर के एक्शन दृश्यों के बावजूद फिल्म कहानी और पटकथा के स्तर पर अपेक्षित प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं हो पाती।
फिल्म की कहानी सीता नाम की युवती के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे बचपन में उसके परिवार से अलग कर एक विद्रोही सैन्य अधिकारी फतेह अपने कब्जे में ले लेता है। फतेह उस पर ‘अल्फा’ नामक पुनर्जीवन सीरम का प्रयोग कर उसे एक शक्तिशाली योद्धा बनाना चाहता है। वर्षों बाद सीता अपने अतीत का सामना करती है और अपने तथाकथित पालक फतेह को खत्म करने के मिशन पर निकलती है। इस अभियान में उसके साथ दुर्गा और खुफिया एजेंसी प्रमुख विक्रम भी शामिल होते हैं, जबकि बाद में ‘वार’ फिल्म के लोकप्रिय जासूस कबीर की भी कहानी में एंट्री होती है।
फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका एक्शन और आलिया भट्ट का प्रभावशाली अभिनय है। उन्होंने सीता के आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और संघर्ष को प्रभावी ढंग से पर्दे पर प्रस्तुत किया है। शरवरी ने भी सहायक भूमिका में अच्छा प्रदर्शन किया है और कई दृश्यों में अपनी अलग पहचान बनाई है। वहीं बॉबी देओल खलनायक के रूप में प्रभाव छोड़ते हैं।
हालांकि फिल्म की पटकथा कई जगह कमजोर नजर आती है। कहानी में कुछ रोचक मोड़ जरूर हैं, लेकिन अधिकांश घटनाक्रम अनुमानित लगते हैं। खुफिया एजेंसी प्रमुख विक्रम का चरित्र भी अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पाता और कई फैसले अविश्वसनीय प्रतीत होते हैं। एक्शन दृश्यों की भरमार के बीच भावनात्मक गहराई और मजबूत कहानी का अभाव साफ महसूस होता है।
फिल्म यह संकेत भी देती है कि भविष्य में ‘अल्फा’, ‘कबीर’, ‘पठान’ और ‘टाइगर’ एक साथ बड़े मिशन में नजर आ सकते हैं। कुल मिलाकर ‘अल्फा’ शानदार कलाकारों और भव्य एक्शन के बावजूद एक औसत स्पाई थ्रिलर बनकर रह जाती है, जिसमें मनोरंजन तो है, लेकिन यादगार कहानी और नए विचारों की कमी साफ दिखाई देती है।
