भारतीय शूटिंग के स्वर्णिम अध्याय का अंत: भारतीय निशानेबाजी के सितारे जसपाल राणा का निधन, खेल जगत में शोक की लहर
जसपाल राणा ने एशियन गेम्स में 4 गोल्ड जीते थे।
नई दिल्ली। भारतीय निशानेबाजी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाले दिग्गज शूटर और कोच जसपाल राणा का शुक्रवार को 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे दिल्ली के मैक्स साकेत अस्पताल में उपचाराधीन थे। नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) के अध्यक्ष कालीकेश नारायण सिंह देव ने उनके निधन की पुष्टि की। उनके असामयिक निधन से भारतीय खेल जगत, विशेषकर निशानेबाजी समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है।
जानकारी के अनुसार, एक जून की रात म्यूनिख से भारत लौटते समय फ्लाइट में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। दिल्ली पहुंचने पर उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जांच के बाद उनके हृदय में स्टेंट डाला गया था। जसपाल राणा वर्तमान में भारतीय जूनियर शूटिंग टीम के कोच और हाई परफॉर्मेंस ट्रेनर के रूप में कार्यरत थे। फरवरी 2025 में उन्हें 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के लिए भारत का हाई परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया गया था। वे पेरिस ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली स्टार निशानेबाज मनु भाकर के कोच भी रहे।
एक खिलाड़ी के रूप में जसपाल राणा का करियर बेहद गौरवशाली रहा। उन्होंने एशियाई खेलों में 8 पदक जीते, जिनमें 4 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल हैं। वहीं कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने 9 स्वर्ण सहित कुल 15 पदक अपने नाम किए। शूटिंग की प्रेरणा उन्हें अपने पिता नारायण सिंह राणा से मिली थी, जिन्होंने बचपन में ही उन्हें इस खेल से परिचित कराया।
उनकी सबसे यादगार उपलब्धियों में 1994 की मिलान विश्व शूटिंग चैंपियनशिप शामिल है, जहां घुटने में गंभीर दर्द और फोड़े की समस्या के बावजूद उन्होंने जूनियर वर्ग में विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता था। उसी वर्ष उन्होंने हिरोशिमा एशियाई खेलों में भी स्वर्ण पदक हासिल किया और मात्र 18 वर्ष की आयु में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हुए।
ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी की स्वर्णिम पीढ़ी के प्रमुख स्तंभ थे। उनका जाना भारतीय खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
