May 31, 2026

सोनीपत: ज्येष्ठ पूर्णिमा पर सतकुम्भा धाम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

Sonipat: A wave of devotion surged at Satkumbha Dham on Jyeshtha Purnima.

सोनीपत: ज्येष्ठ पूर्णिमा पर सतकुम्भा धाम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

गन्नौर, अजीत कुमार। ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर सिद्धपीठ तीर्थ सतकुम्भा धाम में हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर स्नान किया तथा पूजा-अर्चना कर धर्म लाभ प्राप्त किया। सुबह से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था, जो देर शाम तक जारी रहा। तीर्थ परिसर में धार्मिक वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने श्रद्धा एवं भक्ति के साथ विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।

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सोनीपत: ज्येष्ठ पूर्णिमा पर सतकुम्भा धाम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

इस अवसर पर बाबा सीताराम की छमाही के उपलक्ष्य में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। दिनभर श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे एवं अन्य व्यवस्थाओं में सेवादारों ने सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।

Sonipat: A wave of devotion surged at Satkumbha Dham on Jyeshtha Purnima.
सोनीपत: ज्येष्ठ पूर्णिमा पर सतकुम्भा धाम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

पार्क निदान अस्पताल की ओर से निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाया गया। अस्पताल के डॉ. रोहित ढाका ने बताया कि शिविर में लगभग दो सौ लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई। इनमें शुगर, रक्तचाप सहित अन्य सामान्य रोगों की जांच की गई। जरूरतमंद लोगों को प्राथमिक उपचार देने के साथ निशुल्क दवाइयां भी वितरित की गईं।

Sonipat: A wave of devotion surged at Satkumbha Dham on Jyeshtha Purnima.
सोनीपत: ज्येष्ठ पूर्णिमा पर सतकुम्भा धाम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

सिद्धपीठ सतकुम्भा तीर्थ के पीठाधीश्वर श्रीमहंत राजेश स्वरूप महाराज के सान्निध्य में सभी धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम संपन्न हुए। धाम के प्रबंधक सूरज शास्त्री ने कहा कि धार्मिक स्थलों पर स्थापित पूजनीय प्रतीक, देव प्रतिमाएं, ध्वज, कलश और अन्य धार्मिक वस्तुएं केवल आस्था के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे हमारी संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक चेतना को जीवित रखने का माध्यम भी हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे तीर्थ लोगों को धर्म, सेवा, संस्कार और समाजहित के कार्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं।

कार्यक्रम के दौरान संत सत्यवान स्वरूप महाराज, सोमबीर शास्त्री, ब्रह्म प्रकाश, शीशपाल तथा अन्य सेवादार श्रद्धालुओं की सेवा और व्यवस्थाओं में जुटे रहे।

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