May 9, 2026

हेड एंड नेक सर्जरी में रोबोटिक्स बना वरदान: सटीक इलाज से मरीजों को मिल रही तेज रिकवरी

Robotics has become a boon in head and neck surgery, with precise treatment enabling faster recovery for patients.

डॉ. अनादी पचौरी।

नई दिल्ली, अजीत कुमार। आधुनिक चिकित्सा तकनीक ने सर्जरी के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया है। खासतौर पर हेड एंड नेक सर्जरी में रोबोटिक तकनीक ने इलाज को अधिक सुरक्षित, सटीक और प्रभावी बना दिया है। जटिल ऑपरेशन अब पहले की तुलना में कम दर्द, कम जोखिम और तेज रिकवरी के साथ संभव हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रोबोटिक सर्जरी हेड एंड नेक कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों के इलाज में नई उम्मीद बनकर उभरी है।

रोबोटिक हेड एंड नेक सर्जरी एक मिनिमली इनवेसिव तकनीक है, जिसमें सर्जन विशेष कंसोल की मदद से रोबोटिक इंस्ट्रूमेंट्स को नियंत्रित करता है। यह तकनीक शरीर के बेहद संकरे और संवेदनशील हिस्सों तक सटीक पहुंच बनाने में मदद करती है। पारंपरिक सर्जरी में जहां बड़े कट लगाने पड़ते हैं, वहीं रोबोटिक सर्जरी में छोटे या बिना दिखाई देने वाले कट के जरिए ऑपरेशन संभव हो जाता है। इससे मरीज को कम दर्द होता है और रिकवरी भी तेजी से होती है।

मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर एवं यूनिट हेड डॉ. अनादी पचौरी ने बताया कि हेड एंड नेक क्षेत्र में बोलने, निगलने और सांस लेने जैसी महत्वपूर्ण क्रियाओं को सुरक्षित रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। रोबोटिक सर्जरी में हाई-डेफिनिशन और मैग्निफाइड विज़न मिलने से सर्जन छोटे से छोटे स्ट्रक्चर को भी स्पष्ट रूप से देख पाते हैं। इससे आसपास के टिशू को कम नुकसान पहुंचता है और ऑपरेशन अधिक सटीक तरीके से किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि गले, जीभ के बेस और वॉइस बॉक्स जैसे मुश्किल हिस्सों तक बिना बड़े कट के पहुंचना अब संभव हो गया है। वर्तमान समय में मुंह और गले के ट्यूमर, जीभ के बेस की समस्याओं और कुछ वॉइस बॉक्स संबंधी बीमारियों में रोबोटिक सर्जरी का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। कई मामलों में ट्यूमर को मुंह के रास्ते ही हटाया जा सकता है, जिससे बाहरी निशान नहीं बनते और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट आता है।

विशेषज्ञों के अनुसार रोबोटिक सर्जरी में सर्जिकल ट्रॉमा कम होता है, अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि घटती है और ऑपरेशन के बाद दर्द व असुविधा भी कम रहती है। हालांकि इसकी सफलता पूरी तरह सर्जन के अनुभव और कौशल पर निर्भर करती है। भविष्य में बेहतर इमेजिंग, अत्याधुनिक इंस्ट्रूमेंट्स और आधुनिक सर्जिकल प्लानिंग टूल्स के जरिए यह तकनीक और अधिक प्रभावी बनने की संभावना है।

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