अलविदा आशा भोसले: सुरों की मल्लिका आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन, संघर्ष से शिखर तक की अद्भुत कहानी
मुंबई, जीजेडी न्यूज। भारतीय संगीत जगत को आज एक बड़ी क्षति हुई है। सुरों की मल्लिका आशा भोसले का 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। शनिवार रात चेस्ट इन्फेक्शन के चलते उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। करीब 70 वर्षों तक हिंदी सिनेमा में अपनी आवाज का जादू बिखेरने वाली आशा भोसले ने 12 हजार से अधिक गाने गाकर एक अनोखा कीर्तिमान स्थापित किया।
आशा भोसले का जीवन संघर्ष, जुनून और सफलता की मिसाल रहा। आज भले ही वह दुनियाभर में अपनी पहचान और व्यवसाय के लिए जानी जाती थीं, लेकिन उनका बचपन बेहद गरीबी में बीता। फीस न भर पाने के कारण उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था। उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर चोरी-छिपे उन्हें स्कूल ले जाती थीं, लेकिन जब यह बात पकड़ी गई तो दोनों को बाहर कर दिया गया। बाद में लता ने खुद पढ़ाई छोड़कर आशा की शिक्षा और परवरिश की जिम्मेदारी संभाली।
महज 9 साल की उम्र में पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी बढ़ गई। मंगेशकर परिवार पुणे से मुंबई आ गया और यहीं से आशा के संगीत सफर की शुरुआत हुई। 10 साल की उम्र में उन्होंने गाना शुरू किया और मराठी फिल्म से पहला मौका मिला। हालांकि शुरुआती दौर में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। उस समय नूर जहां और शमशाद बेगम जैसी गायिकाओं का दबदबा था, ऐसे में आशा को छोटे-मोटे मौके ही मिलते थे।
उनके जीवन का एक कड़वा अनुभव 1947 में सामने आया, जब उन्हें किशोर कुमार के साथ एक रिकॉर्डिंग के दौरान “आवाज खराब” कहकर स्टूडियो से निकाल दिया गया। यह घटना उनके लिए बड़ा झटका थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आगे चलकर उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा से वही पहचान बनाई, जो कभी उनसे छीन ली गई थी।
निजी जीवन में भी आशा भोसले ने कई उतार-चढ़ाव देखे। 16 साल की उम्र में उन्होंने परिवार के खिलाफ जाकर गणपत राव भोसले से शादी की, लेकिन यह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं टिक सका। बाद में उनकी जिंदगी में आर.डी. बर्मन आए, जिनके साथ उन्होंने कई सुपरहिट गाने दिए। दोनों का रिश्ता भी आसान नहीं था, लेकिन अंततः उन्होंने शादी की और संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
आशा भोसले की निजी जिंदगी दुखों से भी अछूती नहीं रही। उनके बेटे का कैंसर से निधन हुआ, जबकि बेटी ने आत्महत्या कर ली। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने करियर को मजबूती से संभाला।
आज उनके निधन के साथ ही भारतीय संगीत का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया। उनकी आवाज, उनके गीत और उनका संघर्ष हमेशा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
