सोनीपत नगर निगम चुनाव: सोनीपत कांग्रेस में टिकट विवाद से खुली बगावत तेज हो गई
सोनीपत: मेयर उम्मीदवार कमल दीवान अपना पक्ष रखते हुए।
सोनीपत, अजीत कुमार। हरियाणा में लंबे समय बाद संगठन बनने के बाद पहला स्थानीय निकाय चुनाव लड़ रही कांग्रेस में खुली बगावत सामने आ गई है। सोनीपत नगर निगम के पार्षद उम्मीदवारों की सूची जारी होते ही कई नेताओं की नाराजगी सामने आ गई। टिकट न मिलने पर शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी नेताओं ने निर्दलीय चुनाव लड़ने और सार्वजनिक आरोप लगाने शुरु कर दिए हैं।
कांग्रेस के जिला महामंत्री सतबीर निर्माण अपने बेटे राहुल के लिए वार्ड दो से टिकट मांग रहे थे। टिकट न मिलने के बाद उन्होंने कहा कि वे बेटे को निर्दलीय मैदान में उतारने का फैसला लेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर मेयर उम्मीदवार कमल दीवान पर आरोप लगाए और दावा किया कि वे उन्हें पचास हजार से ज्यादा वोटों से हरवाएंगे। उनका कहना है कि उन्हें टिकट दिलाने का भरोसा दिया गया था, लेकिन अंतिम समय पर टिकट काट दिया गया। जिस उम्मीदवार को टिकट दी गई है, वह हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुआ है, जबकि वे लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं।
महिला विंग की प्रदेश महासचिव संतोष कादियान ने भी टिकट न मिलने पर पार्टी छोड़ने और निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। वे वर्ष दो हजार बीस में इनेलो छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुई थीं और वार्ड पांच से टिकट की दावेदार थीं। संतोष कादियान ने आरोप लगाया कि उन्हें टिकट का भरोसा दिया गया था और तीन दिन पहले तक टिकट लगभग तय बताई जा रही थी। इसी भरोसे पर उन्होंने नगर निगम में करीब एक लाख 70 हजार रुपये प्रॉपर्टी टैक्स जमा कराकर एनओसी ली। उन्होंने सोशल मीडिया पर कमल दीवान को हारने वाला और बिकने वाला प्रत्याशी बताया तथा पूर्व विधायक सुरेंद्र पवार पर भी गंभीर आरोप लगाए।
पूर्व डिप्टी मेयर मनजीत गहलावत ने भी टिकट कटने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उनकी टिकट तय थी, लेकिन जिला अध्यक्ष कमल दीवान के दबाव में टिकट काटी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कई नामों को अंतिम सूची में जगह नहीं दी गई। हालांकि उन्होंने कहा कि वे पार्टी के आदेश के साथ हैं।
इन आरोपों पर जिला अध्यक्ष और मेयर उम्मीदवार कमल दीवान ने सफाई देते हुए कहा कि टिकट वितरण जमीनी सर्वे और उम्मीदवारों की क्षमता के आधार पर किया गया है। उनका कहना है कि पार्टी ने जिताऊ उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है और अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान का है।
