April 24, 2026

मथुरा में निरंकारी भक्तों ने किया उत्साहपूर्वक रक्तदान: मानव एकता दिवस करुणा प्रेम और सह-अस्तित्व का सजीव उत्सव – निरंकारी संत

Nirankari devotees enthusiastically donated blood in Mathura Human Unity Day is a living celebration of compassion, love and co-existence - Nirankari Saint

मथुरा, किशोर स्वर्ण। अंजाने लोगों से खून का रिश्ता जोड़ने के लिए वह अलग अलग शहरों से आए मथुरा और पहुंच गए हाइवे नवादा स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन पर आयोजित रक्तदान शिविर में, जहां उन्होंने विपरीत मौसम तपती गर्मी की परवाह किए बगैर उत्साहपूर्वक मानवहित में स्वेच्छा से रक्तदान कर परोपकार की भावना को उजागर किया।

निरंकारी मीडिया सहायक किशोर स्वर्ण ने बताया कि सत्गुरू माता सुदीक्षा जी महाराज की प्रेरणा से आध्यात्मिक वातावरण में हुए रक्तदान शिविर में मथुरा जोन के अलीगढ़, सादाबाद, हाथरस, फरह, नंदगांव, कोसीकलां के साथ ही भीलवाड़ा, भरतपुर, रेवाड़ी, आगरा आदि स्थानों से आए 137 निरंकारी सेवादार भक्तों ने नामांकन कराया, जबकि 96 भक्तों ही रक्त लिया जा सका। शिविर का उद्घाटन रेवाड़ी से आए निरंकारी प्रचारक संत डा कमल सिंह जी तथा मथुरा के जोनल इंचार्ज श्री एच के अरोड़ा जी ने किया।

निरंकारी सेवादल के क्षेत्रीय संचालक श्री अजय यादव, सेवादल संचालक श्री अशोक दयालु और शिक्षक श्री योगेश कुमार के साथ समस्त सेवादल के सदस्य जहां व्यवस्थाओं में जुटे रहे, वहीं रक्तदान में भी आगे रहे। शिविर में मथुरा के महर्षि दयानंद सरस्वती जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक की डा. गीता सिंह के नेतृत्व में परामर्शदाता शुशीला शर्मा सहित दस सदस्यीय स्टाफ टीम ने रक्तदाताओं की समुचित स्वास्थ्य जांच के उपरांत सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से रक्तदान की प्रक्रिया सम्पन्न कराई। जिनसे 96 रक्त युनिट संकलित की गई। संपूर्ण आयोजन के दौरान स्वच्छता, सतर्कता एवं सेवा-भाव का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे यह पहल केवल जीवनदायिनी सेवा तक सीमित न रहकर मानवता, करुणा और उत्तरदायित्व के उच्चतम आदर्श का प्रतीक बनकर उभरी। रक्तदाताओं को प्रशस्ति पत्र भी दिए गए।

डा. गीता सिंह ने निरंकारी मिशन के रक्तदान शिविर की प्रशंसा करते हुए कहा कि रक्तदान सबसे बड़ा पुण्य का काम है, जो मानवहित में सबसे बड़ा परोपकार है। रक्त का कोई विकल्प नहीं है, इसलिए रक्तदान की जरूरत ज्यादा है। सत्गुरू की प्रेरणा पाकर निरंकारी भक्त जिस उत्साह के साथ रक्तदान कर रहे हैं, यह मानव धर्म ही तो निभा रहे हैं।

इस मौके पर रेवाड़ी से आए निरंकारी प्रचारक संत डा कमल सिंह जी रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन करने के उपरांत मानव एकता दिवस सत्संग को सम्बोधित करते हुए कहा कि रक्तदान करके हम किसी पर अहसान नहीं कर रहे, मानव होने के नाते यह हमारा कर्तव्य है कि हम किसी के काम आए। उन्होंने बाबा हरदेव सिंह जी के दीवार रहित संसार के भाव को स्पष्ट करते हुए कहा कि मानव एकता के तहत रक्तदान करके हम उन लोगों से खून का रिश्ता जोड़ रहे हैं, जिंहें हम जानते तक नहीं है।

Nirankari devotees enthusiastically donated blood in Mathura Human Unity Day is a living celebration of compassion, love and co-existence - Nirankari Saintउन्होंने कहा कि जब हृदय में करुणा, प्रेम और एकत्व की दिव्य चेतना जागृत होती है, तब मानव अपने सीमित स्वार्थों से ऊपर उठकर सम्पूर्ण सृष्टि के कल्याण का सशक्त माध्यम बन जाता है। परोपकार, करुणा और परमार्थ जैसे अलौकिक मूल्यों से प्रकाशमान यह पावन अवसर उस दिव्य अनुभूति का प्रतीक बना, जहाँ “मानव को मानव हो प्यारा, एक-दूजे का बने सहारा” का संदेश केवल शब्दों तक सीमित न रहकर हृदयों में जीवंत हुआ। युगप्रवर्तक बाबा गुरबचन सिंह जी ने सत्य, सरलता और सद्भावना का मार्ग दिखाते हुए युवाओं को नशामुक्त जीवन अपनाने और ऊर्जा को समाजसेवा में लगाने की प्रेरणा दी। बाबा हरदेव सिंह जी ने “रक्त नाड़ियों में बहे, नालियों में नहीं” का संदेश देकर सेवा को जीवन का अनिवार्य अंग बनाया, जिसे सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज निरंतर आगे बढ़ा रही हैं।

मानव एकता दिवस पर बाबा गुरबचन सिंह जी की दिव्य स्मृति में, सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के सान्निध्य में दिल्ली में दिव्य सत्संग आयोजित हुआ। इसके साथ ही समूचे देश की हजारों सत्संग केंद्रो पर श्रद्धा और समर्पण भाव से सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि प्रेम, सद्भाव और निष्काम सेवा का जीवंत स्वरूप बनकर उभरा।

मथुरा के जोनल इंचार्ज श्री एच के अरोड़ा जी ने बताया कि मथुरा सहित समूचे भारतवर्ष के लगभग 200 स्थानों पर रक्तदान शिविरों का सफल आयोजन किया गया; जिससे लगभग 40 हजार यूनिट रक्त संकलित किया गया, जो निष्काम सेवा, परोपकार और मानवता के प्रति समर्पण की जीवंत अभिव्यक्ति बनकर उभरा। युगप्रवर्तक बाबा गुरबचन सिंह जी की स्मृति में यह दिवस वर्षभर चलने वाली सेवा-सरिता का शुभारंभ है, जिसके अंतर्गत देशभर में लगभग 705 स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे; जो करुणा और एकत्व की भावना को निरंतर सुदृढ़ करेंगे। रक्तदान की यह पावन परंपरा पिछले चार दशकों से निरंतर जारी है। अब तक 9,174 रक्तदान शिविरों के माध्यम से लगभग 15,00,230 पंद्रह लाख दो सौ तीस यूनिट रक्त संकलित किया जा चुका है, जो मानव सेवा के प्रति निरंकारी मिशन की अटूट प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण है।

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