April 21, 2026

Poet Dalichand Jangid Satara

जांगिड़ ब्राह्मणों से करते है हम यह निवेदन.... खुद जाग के समाज को जगा दो जांगिड़ ब्राह्मणों। कर्त्तव्य जानो और...

नदियां कल कल बहती रहती पहाड़ों से उछल-कूद कर पत्थरों से टकराती बल खाती नाग-मोड़ तीव्र चाल ये चलती अपना...