पं. सत्यपाल जी वत्स की प्रवचन श्रृंखला से.... बीज भी जब माटी के अंदर गहरे में जाकर शांत हो जाता...
Poet Dalichand Jangid Satara
जांगिड़ ब्राह्मणों से करते है हम यह निवेदन.... खुद जाग के समाज को जगा दो जांगिड़ ब्राह्मणों। कर्त्तव्य जानो और...
🕉️ ध्यान और मन 🕉️ "" "" "वर्तमान मे निरन्तर समाज में बदल रही सामाजिक परिस्तिथियों में हर कोई चिंता...
गुरुजी कहते है कि जब कोई साथ ना हो तब खुद से बात करना सीखो। जिंदगी में कई ऐसे पल...
नदियां कल कल बहती रहती पहाड़ों से उछल-कूद कर पत्थरों से टकराती बल खाती नाग-मोड़ तीव्र चाल ये चलती अपना...
