July 1, 2026

1 जुलाई से बदले कई नियम: गैस सस्ती तो पासपोर्ट और कार खरीदना हुआ महंगा

Several rules changed from July 1: LPG became cheaper, while buying a passport and a car became costlier.

नई दिल्ली। एक जुलाई से आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव लागू हो गए हैं। इन बदलावों का असर रसोई गैस, ईंधन, पासपोर्ट, रेल यात्रा, आधार कार्ड, हवाई यात्रा और वाहन खरीदने वालों पर पड़ेगा। जहां व्यावसायिक गैस सिलेंडर और कुछ स्थानों पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत मिली है, वहीं पासपोर्ट शुल्क और नई कारों की कीमतों में बढ़ोतरी से लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा।

तेल विपणन कंपनियों ने व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमतों में औसतन 180 रुपये की कटौती की है। राजधानी दिल्ली में अब व्यावसायिक सिलेंडर 2,930 रुपये में उपलब्ध होगा। इससे होटल, रेस्तरां और खानपान व्यवसाय से जुड़े लोगों की लागत कम होने की उम्मीद है।

Several rules changed from July 1: LPG became cheaper, while buying a passport and a car became costlier.

निजी ईंधन विक्रेता नायरा एनर्जी ने भी पेट्रोल को 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल को 3 रुपये प्रति लीटर सस्ता कर दिया है। साथ ही पेट्रोल पंपों पर एक वाहन में प्रतिदिन केवल 200 लीटर डीजल भरवाने की सीमा भी समाप्त कर दी गई है। इससे परिवहन क्षेत्र और बड़े उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।

केंद्र सरकार ने पासपोर्ट की फीस में भी संशोधन किया है। अब नया पासपोर्ट बनवाने या उसका पुनः जारी कराने के लिए पहले की तुलना में अधिक शुल्क देना होगा। दूसरी ओर, आधार कार्ड में ईमेल पता अपडेट कराने की सुविधा 31 दिसंबर 2026 तक निशुल्क कर दी गई है, जिससे करोड़ों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।

रेल मंत्रालय ने बिना टिकट यात्रा करने वालों पर सख्ती बढ़ाते हुए न्यूनतम जुर्माना 250 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया है। वहीं हवाई ईंधन की कीमतों में कमी से भविष्य में हवाई टिकट सस्ते होने की संभावना जताई जा रही है।

इसके अलावा अधिकांश वाहन कंपनियों ने एक जुलाई से अपने मॉडलों की कीमतों में बढ़ोतरी लागू कर दी है। ऐसे में नई कार खरीदने वाले ग्राहकों को अब पहले की तुलना में अधिक राशि खर्च करनी होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों का असर आम उपभोक्ताओं, व्यापारियों, यात्रियों और परिवहन क्षेत्र पर अलग-अलग रूप में दिखाई देगा। कुछ फैसले राहत देने वाले हैं, जबकि कुछ बदलाव अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बढ़ाएंगे।

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