अग्निपथ योजना में बड़े बदलाव की तैयारी? अधिक अग्निवीरों को स्थायी सेवा में रखने पर विचार, तीनों सेनाओं ने बढ़ाया प्रस्ताव
नई दिल्ली। अग्निपथ योजना को लेकर बड़ा बदलाव होने की संभावना जताई जा रही है। वर्ष 2022 में शुरू की गई इस योजना के तहत वर्तमान में चार वर्ष की सेवा पूरी करने वाले अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को ही नियमित सैनिक के रूप में सेना में शामिल किया जाता है। अब मीडिया रिपोर्टों के अनुसार भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना इस सीमा को बढ़ाने के पक्ष में हैं। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार भारतीय नौसेना चार वर्ष की सेवा पूरी करने वाले लगभग 75 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सेवा में बनाए रखने का प्रस्ताव दे सकती है, जबकि भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना इस संख्या को लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ाने के पक्ष में हैं। अंतिम निर्णय रक्षा मंत्रालय और सैन्य मामलों के विभाग की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।
तीनों सेनाओं का मानना है कि पिछले चार वर्षों में अग्निवीरों ने आधुनिक हथियारों, ड्रोन, निगरानी प्रणालियों, डिजिटल युद्ध प्रणाली और अत्याधुनिक सैन्य तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया है। ऐसे प्रशिक्षित जवानों को चार वर्ष बाद पूरी तरह सेवा से अलग करना सैन्य दृष्टि से व्यावहारिक नहीं माना जा रहा है। यदि अधिक अग्निवीर नियमित सेवा में रखे जाते हैं तो सेना को पहले से प्रशिक्षित और अनुभवी सैनिक उपलब्ध होंगे, जिससे प्रशिक्षण पर होने वाला समय और खर्च भी कम होगा तथा युद्ध क्षमता मजबूत होगी।
विशेष रूप से नौसेना का तर्क है कि आधुनिक युद्धपोतों, पनडुब्बियों और जटिल तकनीकी प्रणालियों के संचालन के लिए लंबे समय तक प्रशिक्षित कर्मियों की आवश्यकता होती है। इसी कारण नौसेना सबसे अधिक संख्या में अग्निवीरों को स्थायी सेवा में रखने की पक्षधर बताई जा रही है।
अग्निपथ योजना के पहले बैच ने वर्ष 2023 में प्रशिक्षण शुरू किया था और अब वर्ष 2026 में उनका चार वर्ष का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। मौजूदा नियमों के अनुसार पहले सभी अग्निवीर सेवा से मुक्त होंगे। इसके बाद मेरिट, मेडिकल फिटनेस, अनुशासन, प्रशिक्षण प्रदर्शन, तकनीकी दक्षता, नेतृत्व क्षमता और सेना की आवश्यकता के आधार पर नियमित सैनिकों का चयन किया जाएगा।
सेना में भविष्य की जरूरतों को देखते हुए अग्निवीरों की भर्ती बढ़ाने की भी तैयारी है। बताया जा रहा है कि अगले प्रशिक्षण चक्र में लगभग 90 हजार रिक्तियां निकाली जा सकती हैं, जबकि पिछले चक्र में करीब 70 हजार अग्निवीर प्रशिक्षण ले रहे थे। इसका उद्देश्य सेना में मौजूद जवानों की कमी को चरणबद्ध तरीके से पूरा करना है।
जो अग्निवीर नियमित सेवा के लिए चयनित नहीं होंगे, उन्हें सेवा निधि पैकेज के तहत लगभग 11.71 लाख रुपये (आयकर मुक्त), कौशल प्रमाणपत्र, अनुभव प्रमाणपत्र तथा विभिन्न सरकारी और निजी क्षेत्रों में रोजगार सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। केंद्र सरकार पहले ही केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, असम राइफल्स सहित कई सरकारी सेवाओं में अग्निवीरों के लिए आरक्षण और आयु सीमा में छूट की घोषणा कर चुकी है। कई राज्य सरकारों ने भी पुलिस भर्ती और अन्य सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने की घोषणा की है।
यदि सरकार भविष्य में नियमित सेवा के लिए चयन प्रतिशत बढ़ाने का निर्णय लेती है, तो इसे अग्निपथ योजना की शुरुआत के बाद का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव माना जाएगा। इससे सेना को अधिक अनुभवी सैनिक मिलेंगे और अग्निवीरों के लिए स्थायी सैन्य सेवा के अवसर भी पहले की तुलना में काफी बढ़ सकते हैं।
