January 25, 2026

कवि दलीचंद जांगिड़ की कलम से: स्वयं से खुद बात करना सीखो

From the pen of poet Dalichand Jangid: Learn to talk to yourself

गुरुजी कहते है कि जब कोई साथ ना हो तब खुद से बात करना सीखो। जिंदगी में कई ऐसे पल आते है जब कोई नहीं होता तुम्हारे पास – – – – न सलाह देने वाला, न सहारा बनने वाला। तब स्वयं से स्वयं बात करना भी एक कला है फिर स्वयं से प्रश्न भी पुछो की क्या मैं ठीक कर रहा हूं…? क्या मुझे कुछ बदलाव करने की जरुरत है और क्या मैं खुद से खुश हूं…. आगे गुरु कहते की जब तुम खुद को समझने लगते हो तब आप संसार की भीड़-भाड़ से विभक्त होकर अपने आप (अपनी आत्मा से बातें करना) से बातें कर आत्म-ज्ञान की ओर बढ़ते नझर आएंगे और पाएंगे की मैं कौन हूँ—-तब आत्मा से सच्चे जवाब मिलने शुरु हो जाएंगे। ये वैदिक ज्ञान गुरु के सानिध्य में अष्टयोग का ज्ञान आचरण (ध्यान योग) में लाने से मिलना शुरु होता है। इसी प्रकार एक ओर साधना की उत्तम विधी अपना सकते है जो इस प्रकार से है….

ऐकान्तवास ही आत्मज्ञान प्राप्ति का मुख्य ठिकाण है, जहां वन-रमण्य स्थल, नदी किनारे, पहाड़ों की वादियों में या फिर एक प्राचीन शिवालय हो, या घर के अंदर ही एकान्त में एक बंद कमरा हो,जहां किसी प्रकार का आवाज न हो वहां गर्म कम्बल का आसान लगाकर बैठ कर दोनो आँखो के भवो के बीच में जहां ज्ञान केन्द्र स्थिति है वहां ध्यान करे और अब अपने आपसे करो सवाल कि मैं कौन हूं और कहां से आया हूं वह मुझे इस मनुष्य योनि में आकर करना क्या है…? हे प्रभु इसका मुझे सही मार्ग बताओ….? तब वही से सच्चे जवाब मिलने शुरु हो जाएंगे। और आप अकेले में रहने की आदत बना लोंगे। तथा यही मार्ग आपको अपनी आत्मा का अनुभव कराकर एक विशेष प्रकार की शान्ति (अषिम आंनद) प्रदान कर ईश्वर से मिला देगा।
जय श्री ब्रह्म ऋषि अंगिरा जी की

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