आनंदमूर्ति गुरुमां: मर्यादा, ज्ञान और वीरता का आदर्श हैं राम
सोनीपत: रामनवमी पर ऋषि चैतन्य आश्रम गन्नौर में आनंदमूर्ति गुरुमां के श्रद्धालुओं को अभिवादन स्वीकारते हुए।
- रामनवमी पर आश्रम में संन्यास दिवस का भव्य आयोजन सम्पन्न
सोनीपत, अजीत कुमार। ऋषि चैतन्य आश्रम गन्नौर में गुरुवार को रामनवमी तथा आनंदमूर्ति गुरुमां के संन्यास दिवस का आयोजन भक्ति और उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम का आरम्भ गुरु वंदना और राम, जय राम, जय जय राम के सामूहिक संकीर्तन से हुआ, जिससे आश्रम का वातावरण भक्तिमय बन गया। बड़ी संख्या में साधक उपस्थित रहे और पूरे परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया गया।
गुरुमां ने नवमी अंक के आध्यात्मिक महत्व पर कहा कि मर्यादा, ज्ञान और वीरता का आदर्श राम हैं। गुरुमां ने कहा कि अंक नौ पूर्णता और सिद्धि का प्रतीक है तथा रामनवमी इसी पूर्णता का उत्सव है। पौराणिक प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने बताया कि राम अवतार केवल दैवी लीला नहीं बल्कि मानव जीवन के लिए आदर्श मार्गदर्शन है।
नारद प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इंद्र वास्तव में मन चंचलता का प्रतीक है। साधना के समय मन वासनाओं के रूप में बाधाएँ उत्पन्न करता है। नारद ने तप से मन पर विजय प्राप्त कर ली, परंतु श्रेष्ठ होने का सूक्ष्म अहंकार उन्हें पतन की ओर ले गया। इसी भाव में उन्होंने विष्णु को मनुष्य रूप में जन्म लेने और पत्नी वियोग सहने का श्राप दिया, जिससे राम अवतार का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह कथा साधकों को अहंकार से सावधान रहने की सीख देती है। जनक की पुष्पवाटिका में राम और सीता के प्रथम मिलन तथा निष्काम गौरी पूजन का वर्णन कते हुए कहा कि स्वयंवर में राम को देखकर विदेह राजा जनक का हृदय अपार शांति से भर गया था, जो दिव्य पवित्रता का प्रतीक है। गुरुमां ने राम को मर्यादा, ज्ञान और वीरता का आदर्श बताते हुए तुलसीदास और वाल्मीकि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। भजनों पर झूमते साधकों के साथ सत्संग का समापन हुआ और प्रसाद वितरण किया गया।
