April 28, 2026

सोनीपत: पार्किंसन के शुरुआती संकेत पहचानें, समय पर इलाज से बेहतर जीवन

Recognize early signs of Parkinson's, timely treatment can lead to a better life

मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के न्यूरोलॉजी विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. केके जिंदल।

सोनीपत, अजीत कुमार।  पार्किंसन एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है, जो शरीर की गतिविधियों और संतुलन को प्रभावित करती है। यह तब विकसित होती है जब दिमाग की डोपामिन बनाने वाली कोशिकाएं धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। डोपामिन का स्तर घटने के साथ ही शरीर में मूवमेंट से जुड़े लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

अक्सर लोग मानते हैं कि पार्किंसन की शुरुआत हाथ कांपने से होती है, लेकिन ऐसा हर मामले में नहीं होता। कई बार इसके शुरुआती संकेत बेहद हल्के होते हैं, जिन्हें लोग थकान, तनाव या उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही कारण है कि भारत में इस बीमारी की पहचान अक्सर देर से होती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती लक्षणों में शरीर की गति का धीमा होना प्रमुख है। रोजमर्रा के काम जैसे बटन लगाना, चलना या कुर्सी से उठना कठिन लगने लगता है। हाथ-पैरों में अकड़न, चलते समय एक हाथ का कम हिलना भी संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा सूंघने की क्षमता कम होना, नींद में समस्या, कब्ज, अचानक थकान और मूड में बदलाव जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

पार्किंसन एक प्रोग्रेसिव बीमारी है, यानी समय के साथ इसके लक्षण बढ़ते जाते हैं। हालांकि, यदि इसे शुरुआती अवस्था में पहचान लिया जाए तो इसके प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसकी जांच किसी न्यूरोलॉजिस्ट द्वारा लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक परीक्षण के आधार पर की जाती है, क्योंकि इसका कोई एक निश्चित टेस्ट नहीं है।

हालांकि इसका स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों से लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। दवाइयों के साथ-साथ नियमित व्यायाम, फिजियोथेरेपी और योग से मरीजों को काफी लाभ मिलता है। गंभीर मामलों में डीप ब्रेन स्टिम्यूलेशन जैसी उन्नत तकनीक भी उपयोगी साबित हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय पर पहचान, उचित इलाज और परिवार के सहयोग से पार्किंसन के मरीज भी लंबे समय तक सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकते हैं।

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