March 14, 2026

कवि दलीचंद जांगिड़: पेट्रोल, गैस और बिजली लाइफ लाइन है हमारी….

Poet Dalichand Jangid: Petrol, gas and electricity are our lifelines…

फोटो AI से बनाई गई है।

मुंबई , जीजेडी न्यूज। जब हम गांवों में थे तब हमारा विकास मंद गति का था, लेकिन हम सबके साथ प्रेमभाव से रहने के कारण किसी के साथ राग द्वेष नहीं था और न ही किसी से स्पर्धा थी। सबके पास अपने अपने पैत्रिक काम धन्धे थे, समाज में लेन-देन के  व्यवहार, और व्यापार अनाज की देन-लेन से ही संभव थे कारण रूपये सबके पास नहीं होते थे। सभी वर्ग के लोग सुख-चैन से रहते थे, तब गांवों में भाईचारा (लिहाज) की प्रथा बड़ी प्रबल थी, जो आज के जमाने में लूप्त सी हो गयी है।

आगे चलकर करीबन चालीस-पचास वर्ष पहले गांवों में पैत्रिक काम धन्धे में बड़ा बदलाव देखने को मिला था,वह धीरे धीरे पैत्रिक काम धन्धो से परिवार चलाने के लिए खर्चों की आपूर्ति नहीं होने की वजह से वह नवयुवाओं का पढाई का स्त्तर ऊपर उठने के कारण खेती बाड़ी से ध्यान हटकर नौकरी की तरफ वह  गांवों से शहरों की ओर काम धंधे के लिए रुख किया था, तब से लेकर अब तक यह सिलसिला शुरू ही है। शहरों में जाकर युवाओं ने वैज्ञानिकों से मिलकर अपने हूनर व परिश्रम से पेट्रोल, गैस और बिजली के स्त्रोत से अनेक विकास के लिए आवश्यक मशीनरी का निर्माण किया और प्रगति की वह गति चलाई की आज “भारत वर्ड की चौथी अर्थ व्यवस्था” में गिना जाने लगा है।

भारत की लगातार हो रही प्रगति में पेट्रोल, गैस और बिजली से  हमें विकास की ओर जाने के लिए जो सहभाग मिला वह अद्भूत था। पेट्रोल से चलने वाले वाहनों के द्वारा यातायात व व्यापार को गति मिली व गैस से बनने वाले उत्पादनों की मशीनरी बनाई गई साथ ही बिजली पर आधारित अनेक मशीनरी से अनेक कल-कारखानों को गति प्रदान की गई है। आज की मॉडर्न मानव जीवन शैली ने प्रगति के नए-नए आयाम स्थापित किए हैं। इस तरह आज का मनुष्य तेज गति से विकास कर पाया है।

वर्तमान में चल रहे अनेक युद्धों से फिर पेट्रोल गैस की कमी के कारण विकास की गति को ब्रेक लगने की संभावना को नहीं नाकारा जा सकता है। इसीलिए पेट्रोल, गैस और बिजली वर्तमान में हमारी “लाइफ लाईन” ही बन चुकी है, पेट्रोल व गैस तो हमें बाहर के देशों से आयात करनी पड़ती है। इसकी चिंता हमें चल रहे युद्धों के कारण हो रही है, कारण हमारी विकास की “लाइफ लाइन” को थोड़ी रुकावटों का सामना करना पड़ेगा….?

जय श्री विश्वकर्मा जी की

 

 

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