स्वामी लीलाशाह जयंती पर होंगे विविध कार्यक्रम: 16 को वाहन रैली, 17 को रक्तदान शिविर
स्वामी लीलाशाह जयंती पर होंगे विविध कार्यक्रम।
मथुरा, किशोर इसरानी। सिंधी जनरल पंचायत के तत्वावधान में सिंधी उत्सव शुरू हो चुके हैं, इसी कड़ी में सिंधी समुदाय के मार्गदर्शक आध्यात्मिक गुरू स्वामी लीलाशाह महाराज जी की 146 वीं जयंती नगर में धूमधाम से मनायी जायेगी। मीडिया प्रभारी किशोर इसरानी ने बताया कि 13 मार्च शुक्रवार को को प्रातः 6 बजें बहादुर पुरा स्थित स्वामी लीलाशाह सिंधी धर्मशाला से पूजा आरती के बाद संकीर्तन यात्रा शुरू होगी जिसमें स्वामी लीलाशाह की छवि की आकर्षक झांकी नगर भ्रमण करेगी और समापन पर भजन-कीर्तन होगा।
पंचायत के अध्यक्ष नारायणदास लखवानी ने बताया कि स्वामी लीलाशाह जयंती को भक्तिमय स्वरूप प्रदान करने के लिए सिंधी जनरल पंचायत द्वारा रूपरेखा तय कर दी गई। महामंत्री बसंत मंगलानी ने बताया कि स्वामी लीलाशाह जयंती पर विविध कार्यक्रम आयोजित किये जायेेंगे।
मुख्य संयोजक रामचंद्र ख़त्री ने बताया कि सिंधी उत्सव के मुख्य संयोजक रामचंद्र खत्री ने बताया कि सिंधी संस्कृति और चेटीचंड पर्व को ध्यान में रखते हुए सिंधी नवयुवक मंडल द्वारा युवा अध्यक्ष तरूण लखवानी, उपाध्यक्ष मनोहर मंगलानी, महामंत्री तरूण नाजवानी के नेतृत्व में गोवर्धन चौराहे से सुबह 8 बजे वाहन रैली निकाली जाएगी, जिसका समापन डीग गेट, होली गेट होते हुए बहादुर पुरा स्थित स्वामी लीलाशाह सिंधी धर्मशाला में होगा।
सिंधी संत की की स्मृति में 17 मार्च को होगा रक्तदान
17 मार्च मंगलवार को मंडी चौराहे के पास लाइफ केयर ब्लड बैंक में सुबह 11 बजे से रक्तदान शिविर आयोजित किया जायेगा, जिसमें मुख्य संयोजक चंदनलाल आडवानी और संयोजक किशोर इसरानी के नेतृत्व में सिंधी युवाओं द्वारा स्वामी लीलशाह जी महाराज को समर्पित रक्तदान भी किया जाएगा। इससे पूर्व कृष्णा आर्चिड में सुबह आठ बजे भगवान झूलेलाल की ज्योत प्रज्वलित की जायेगी।
स्वामी लीलाशाह सनातन धर्म के उच्च ज्ञाता थे
स्वामी लीलाशाह जी हर किसी को ईश्वर की उपासना व जनसेवा की ओर प्रेरित करने वाले मानवता के सच्चे हितेषी थे। सिंधी लेखक किशोर इसरानी ने बताया कि अखंड भारत के सिंध प्रांत से जुड़े हैदराबाद जिले की टंडे बाग तहसील में महाराव चंडाई नामक गांव में सन् 1880 में ब्रहम क्षत्रिय कुल में स्वामी लीलाशाह जी का जन्म हुआ था।
स्वामी लीलाशाह वेद विद्या और सनातन धर्म के उच्च ज्ञाता थे, वह समाज में व्यप्त कुरीतियों तथा लुप्त होते धार्मिक संस्कारों से काफी दुखी थे। उन्होंने भारतीय संस्कृति के पुनरोत्थान तथा सोई हुई आध्यात्मिकता को जगाने के लिये बेहतर कार्य किये उन्होंने जहां समाज को आध्यात्मिक संदेश दिया वहीं समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने हेतु सबको जागृत किया और दहेज बिना सामुहिक विवाह समारोह के प्रेरक आयोजन शुरू कराये।
किशोर इसरानी ने बताया कि स्वामी लीलाशाह समाज के निर्बल वर्ग की पीड़ा से काफी आहत रहते थे, उन्होंने निर्धन विद्यार्थियों को पाठ्य सामिग्री एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई। कई स्थानों पर धर्मशाला, गौशाला, पाठशाला व सत्संग भवन बनवाये, ऐसे महान संत ने अपना सम्पूर्ण जीवन समाज सेवा में अर्पण करते हुए 4 नवम्बर सन् 1973 को अपना नश्वर शरीर त्याग दिया।
