ट्रम्प का बड़ा दावा: ईरान जंग जीत चुके, मिशन बाकी; 6 दिन में ₹1 लाख करोड़ खर्च, तेहरान ने रखीं शांति की 3 शर्तें
ट्रम्प का बड़ा दावा- ईरान जंग जीत चुके, मिशन बाकी; 6 दिन में ₹1 लाख करोड़ खर्च, तेहरान ने रखीं शांति की 3 शर्तें
अमेरिका, जीजेडी न्यूज। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी भीषण टकराव अब 13वें दिन में प्रवेश कर चुका है और हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि इस युद्ध में अमेरिका पहले ही बढ़त हासिल कर चुका है, हालांकि मिशन पूरी तरह खत्म होने तक लड़ाई जारी रहेगी।
केंटकी राज्य में आयोजित एक रैली के दौरान ट्रम्प ने कहा कि युद्ध के पहले ही घंटे में यह साफ हो गया था कि अमेरिकी सेना ईरान से आगे है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने ईरान की सैन्य ताकत को काफी हद तक कमजोर कर दिया है। ट्रम्प के इस बयान से यह संकेत भी मिला कि अमेरिका फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं है।
इस बीच अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने संसद को जानकारी दी कि युद्ध के शुरुआती छह दिनों में ही अमेरिका करीब 11.3 अरब डॉलर, यानी लगभग एक लाख करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। इसमें करीब पांच अरब डॉलर केवल हथियारों और गोला-बारूद पर खर्च किए गए हैं। यह आंकड़ा बताता है कि यह संघर्ष केवल सैन्य नहीं बल्कि आर्थिक रूप से भी बेहद भारी साबित हो रहा है।
दूसरी ओर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने साफ कर दिया है कि युद्ध समाप्त करने के लिए तीन शर्तें पूरी करनी होंगी। पहली, ईरान के कानूनी अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी जाए। दूसरी, युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई की जाए। और तीसरी, भविष्य में ईरान पर किसी भी हमले को रोकने की अंतरराष्ट्रीय गारंटी दी जाए।
इस तनाव के बीच बहरीन में भी हलचल बढ़ गई है। वहां के गृह मंत्रालय ने ईरान के लिए जासूसी करने के आरोप में चार बहरीनी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इन पर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से संपर्क रखने और महत्वपूर्ण स्थानों की तस्वीरें तथा लोकेशन एन्क्रिप्टेड सॉफ्टवेयर के जरिए भेजने का आरोप है।
युद्ध का सबसे भयावह असर बच्चों पर पड़ रहा है। यूनिसेफ के अनुसार मध्य-पूर्व में जारी हिंसा में अब तक 1100 से अधिक बच्चे घायल या मारे जा चुके हैं। लगातार हमलों के कारण लाखों बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और हजारों परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना पड़ रहा है।
इधर ईरान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोरने वाली चेतावनी भी दी है। ईरानी सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोलफकारी ने कहा कि यदि संघर्ष बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपने विरोधियों तक तेल पहुंचने नहीं देगा और ऐसे देशों की ओर जाने वाले जहाजों को वैध निशाना माना जा सकता है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी खाड़ी देशों और जॉर्डन पर हुए हमलों की निंदा करते हुए तुरंत संघर्ष रोकने की मांग की है। हालांकि इस प्रस्ताव पर चीन और रूस ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।
इस बीच युद्ध का एक मानवीय और दर्दनाक पहलू भी सामने आया है। संयुक्त अरब अमीरात में कई लोग देश छोड़ते समय अपने पालतू कुत्तों और बिल्लियों को सड़कों या शेल्टर में छोड़कर जा रहे हैं। पशु संरक्षण संगठनों का कहना है कि यह स्थिति बेहद अमानवीय है और बड़ी संख्या में जानवर बिना भोजन और पानी के भीषण गर्मी में तड़प रहे हैं।
स्पष्ट है कि यह युद्ध अब केवल तीन देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था और मानवीय संकट पर पड़ने लगा है।
