संसद बजट सत्र का दूसरा चरण: पश्चिम एशिया युद्ध पर चर्चा की मांग को लेकर संसद में हंगामा, बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन लोकसभा स्थगित
संसद बजट सत्र का दूसरे चरण में बोलते विदेश मंत्री।
नई दिल्ली, अजीत कुमार। संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन लोकसभा में पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। विपक्ष ने इस युद्ध के बाद बने हालात और उसके भारत पर पड़ने वाले संभावित असर पर तत्काल चर्चा की मांग की। विपक्षी सांसदों ने सदन में नारेबाजी करते हुए “वी वॉन्ट डिस्कशन” के नारे लगाए, जिसके चलते कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा और लोकसभा दोनों सदनों में सरकार की तैयारियों और खाड़ी देशों से भारतीयों की वापसी के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 67 हजार भारतीय अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंच चुके हैं। सरकार ने कहा कि वह स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा को तैयार है, लेकिन विपक्ष ने दूसरा प्रस्ताव लाकर प्रक्रिया में बाधा डाली। लगातार हंगामे के बाद लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई।
संसद में हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही स्थगित
संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन लोकसभा की कार्यवाही विपक्ष के हंगामे के कारण बाधित रही। विपक्ष पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष तथा उसके भारत पर पड़ने वाले असर पर चर्चा की मांग करता रहा। सदन में विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी करते हुए चर्चा की मांग की, जबकि सरकार ने कहा कि वह नियमों के तहत चर्चा के लिए तैयार है। लगातार व्यवधान के चलते कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई।
विदेश मंत्री ने युद्ध और भारतीयों की सुरक्षा पर दी जानकारी
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दोनों सदनों में पश्चिम एशिया की स्थिति पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष भारत के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय रहते और काम करते हैं। उन्होंने बताया कि खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं, जबकि ईरान में भी हजारों भारतीय पढ़ाई और नौकरी के लिए मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि सरकार वहां फंसे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर लगातार प्रयास कर रही है और अब तक लगभग 67 हजार भारतीय अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंच चुके हैं।
ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन पर बढ़ी चिंता
जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इस इलाके से भारत को तेल और गैस की बड़ी आपूर्ति होती है। युद्ध के कारण सप्लाई चेन में रुकावट और अस्थिरता गंभीर चिंता का विषय बन गई है। उन्होंने कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और संबंधित मंत्रालय आपस में समन्वय कर रहे हैं।
ईरान से संपर्क में मुश्किलें
विदेश मंत्री ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में ईरान की नेतृत्व स्तर की सरकार से संपर्क करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष में कई वरिष्ठ ईरानी अधिकारी मारे गए हैं और क्षेत्र में बुनियादी ढांचा भी भारी नुकसान झेल चुका है। भारत शांति और संवाद के पक्ष में है और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखे हुए है।
विपक्ष का वॉकआउट और नारेबाजी
राज्यसभा में जयशंकर के संबोधन के दौरान विपक्षी दलों ने वॉकआउट किया। वहीं लोकसभा में उनके भाषण के दौरान विपक्षी सांसदों ने “वी वॉन्ट डिस्कशन” के नारे लगाए और लगातार हंगामा किया। चेयर द्वारा बार-बार शांति बनाए रखने की अपील के बावजूद विपक्ष शांत नहीं हुआ।
सरकार का आरोप—विपक्ष बहस से भाग रहा
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस बहस से भाग रही है। उन्होंने कहा कि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तारीख तय की गई थी, लेकिन विपक्ष ने उसी समय दूसरा प्रस्ताव लाकर प्रक्रिया को बाधित किया। उनके अनुसार विपक्ष संसद की कार्यवाही को बाधित कर समय बर्बाद कर रहा है।
विपक्ष बोला—सरकार को भरोसे में लेना होगा
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध और उससे पैदा हुए ऊर्जा संकट जैसे गंभीर मुद्दों पर संसद में चर्चा जरूरी है। उनका कहना था कि यह केवल किसी एक पार्टी का मामला नहीं है और सरकार को विपक्ष को भरोसे में लेकर इस पर चर्चा करनी चाहिए।
सरकार का दावा—स्थिति पर लगातार नजर
भाजपा सांसद और पूर्व विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला ने कहा कि विदेश मंत्री ने सदन में विस्तृत बयान दिया है और सरकार पश्चिम एशिया की स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है।
