March 6, 2026

कामयाबी के कदम: सोनीपत के वैभव ने यूपीएससी में 344वीं रैंक पाकर रचा इतिहास

Steps to Success: Vaibhav from Sonipat created history by securing 344th rank in UPSC

सोनीपत: यूपीएससी में चयनित वैभव को उसके निवास स्थान पर राजीव जैन शुभकामनाएं देते हुए।

सोनीपत, अजीत कुमार। संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2025 का अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद जिले में खुशी का माहौल बन गया। शहर के वेस्ट रामनगर निवासी वैभव ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में 344वीं रैंक हासिल कर परिवार और जिले का नाम रोशन किया है। वैभव मूल रूप से गांव चिटाना के निवासी हैं और उनका परिवार लंबे समय से सोनीपत शहर में रह रहा है। जैसे ही परिणाम की जानकारी परिवार और रिश्तेदारों तक पहुंची, घर में खुशी की लहर दौड़ गई। परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों ने मिठाइयां बांटकर खुशी मनाई और बधाई देने वालों का तांता लग गया। यूपीएससी में चयनित अभ्यर्थियों के निवास स्थान पर जाकर राजीव जैन ने शुभकामनाएं दीं।

वैभव बचपन से ही पढ़ाई में होनहार रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2017 में सोनीपत के हिन्दू सीनियर सेकेंडरी विद्यालय से दसवीं की परीक्षा पास की। इसके बाद वर्ष 2019 में डीएवी विद्यालय से बारहवीं की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज से वर्ष 2022 में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से इतिहास विषय में वर्ष 2024 में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की। पढ़ाई के दौरान उनका प्रदर्शन लगातार उत्कृष्ट रहा और शिक्षकों का भी मानना था कि उनमें असाधारण क्षमता है।

वैभव ने बताया कि कोविड-19 के समय उनकी बड़ी बहन रितिका शर्मा ने उन्हें सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए प्रेरित किया। उसी दौरान उन्होंने तय कर लिया कि उन्हें यूपीएससी परीक्षा पास करनी है। उन्होंने बताया कि उन्होंने किसी भी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया। वह प्रतिदिन लगभग सात से आठ घण्टे घर पर बैठकर अध्ययन करते थे और साथ ही अपनी स्नातक व स्नातकोत्तर पढ़ाई भी जारी रखी। उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी और केवल यूट्यूब का उपयोग शैक्षणिक सामग्री देखने के लिए किया।

Steps to Success: Vaibhav from Sonipat created history by securing 344th rank in UPSC
सोनीपत: वैभव संघ लोक सेवा आयोग कार्यालय के बाहर।

उन्होंने वर्ष 2023 में पहली बार यूपीएससी परीक्षा दी, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद वर्ष 2024 में दूसरे प्रयास में मुख्य परीक्षा तक पहुंचे, परन्तु अंतिम चयन नहीं हो सका। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी कमियों पर काम किया। लगातार मेहनत और एकाग्रता के साथ तीसरे प्रयास में उन्होंने 344वीं रैंक प्राप्त कर सफलता हासिल की।

तैयारी के दौरान उन्होंने वर्ष 2024 में हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा भी दी थी, परन्तु उसमें सफलता नहीं मिली। इस असफलता के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया और तैयारी जारी रखी। वैभव के पिता जय भगवान पेशे से अधिवक्ता हैं और लगभग पन्द्रह वर्षों से वकालत कर रहे हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। परिवार में बड़ी बहन रितिका शर्मा चार्टर्ड अकाउंटेण्ट हैं और छोटी बहन भारती न्यायिक सेवा परीक्षा की तैयारी कर रही हैं।

मां सीमा ने बताया कि वैभव बचपन से ही पढ़ाई में अच्छा रहा है और हमेशा अच्छे अंक लाता था। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी बेटे को ट्यूशन नहीं लगवाया, वह स्वयं मेहनत करके पढ़ाई करता रहा। मां ने कहा कि वह अधिक पढ़ी-लिखी नहीं हैं, लेकिन उन्हें गर्व है कि उनके तीनों बच्चे अपने-अपने क्षेत्र में अच्छा कर रहे हैं।

बड़ी बहन रितिका शर्मा ने कहा कि वैभव की सफलता उसकी मेहनत और लगन का परिणाम है। वह जो भी काम करता है, पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ करता है। इसी कारण उसने यह बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

वैभव के पिता जय भगवान ने भावुक होते हुए कहा कि बेटे की इस उपलब्धि को शब्दों में बयान करना कठिन है। जब वैभव ने उन्हें बताया कि उसका यूपीएससी चयन हो गया है तो पहले उन्हें विश्वास नहीं हुआ। परिणाम देखने के बाद पूरे परिवार में खुशी का माहौल बन गया और पड़ोसी भी बधाई देने के लिए घर पहुंचने लगे।

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