March 13, 2026

सोनीपत: मुरथल ढाबों पर कमर्शियल गैस संकट, भट्ठी व इंडक्शन सहारा

Sonepat Commercial gas crisis at Murthal dhabas, furnace and induction are the only support

सोनीपत: भट्‌ठी पर काम करते हुए ढाबे के कर्मचारी।

सोनीपत, अजीत कुमार। सोनीपत के मुरथल स्थित प्रसिद्ध ढाबों पर इन दिनों कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी के कारण एलपीजी गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से कई ढाबा संचालकों को रसोई व्यवस्था बदलनी पड़ी है। गैस की उपलब्धता घटने के कारण अब अधिकतर खाना लकड़ी और कोयले की भट्ठियों पर तैयार किया जा रहा है।

ढाबा संचालकों का कहना है कि पहले रसोई का अधिकतर काम गैस पर होता था, लेकिन अब गैस का उपयोग लगभग 70 प्रतिशत तक कम कर दिया गया है। रेशम ढाबा के प्रबंधक मंगत राम के अनुसार फिलहाल केवल 30 प्रतिशत काम ही गैस पर किया जा रहा है। मुख्य रूप से तवे की रोटी और पराठे गैस पर बनाए जा रहे हैं, जबकि बाकी व्यंजन भट्ठियों पर तैयार किए जा रहे हैं।

मंगत राम ने बताया कि काम सुचारु रखने के लिए ढाबे पर पांच भट्ठियां लगाई गई हैं। एक भट्ठी को पूरी तरह चालू होने में करीब 30 से 40 मिनट का समय लगता है। गैस की तुलना में भट्ठी पर खाना बनने में लगभग 15 मिनट अधिक लग रहे हैं, जिससे रसोई की गति भी प्रभावित हो रही है। मुरथल ढाबा संगठन के प्रधान मंजीत सिंह ने बताया कि गैस की कमी का सबसे ज्यादा असर छोटे ढाबों पर पड़ा है। बड़े ढाबों के पास कुछ वैकल्पिक साधन हैं, लेकिन छोटे संचालकों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने बताया कि कई ढाबों ने जरूरत के अनुसार इंडक्शन चूल्हे भी मंगवा लिए हैं, ताकि आपात स्थिति में उनका उपयोग किया जा सके। हालांकि कमर्शियल बिजली दर अधिक होने के कारण उनका अधिक उपयोग करना महंगा पड़ सकता है। ढाबों में पहले 10 से 12 प्रमुख व्यंजन गैस पर तैयार किए जाते थे। इनमें रेड और व्हाइट ग्रेवी, चॉक मसाला, कढ़ाई पनीर, बटर मसाला, मिक्स वेज, येलो दाल और दाल मखनी शामिल हैं। अब इन व्यंजनों को भी लकड़ी और कोयले की भट्ठियों पर बनाया जा रहा है।

ढाबा संचालकों का कहना है कि गैस संकट के बावजूद ग्राहकों की सुविधा बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल मेनू और कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, ताकि यात्रियों को पहले की तरह ही सेवा मिलती रहे।

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