January 26, 2026

नई दिल्ली: प्रो. के.पी. सिंह की पुस्तक न्यू पार्लियामेंट- द वॉयस ऑफ भारत’ का लोकार्पण

Launch of Prof. K.P. Singh's book 'New Parliament - The Voice of India'

प्रो. के.पी. सिंह की पुस्तक न्यू पार्लियामेंट- द वॉयस ऑफ भारत’ का लोकार्पण

नई दिल्ली, अजीत कुमार। दिल्ली विश्वविद्यालय के गांधी भवन के निदेशक एवं पुस्तकालय विज्ञान के प्रख्यात विद्वान प्रो. के.पी. सिंह की बहुप्रतीक्षित पुस्तक न्यू पार्लियामेंट – द वॉयस ऑफ भारत का लोकार्पण मंगलवार को उत्तराखंड सदन, नई दिल्ली में हुआ। पुस्तक का विमोचन उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने किया।

कार्यक्रम की शुरुआत में प्रो. के.पी. सिंह ने राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह का पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र, स्मृति-चिह्न एवं श्रीमद्भागवत गीता की प्रति भेंट कर सम्मान किया। अपने स्वागत वक्तव्य में प्रो. सिंह ने कहा कि महामहिम से उन्हें लेखन के लिए विशेष प्रेरणा मिली है। लॉकडाउन के समय से अब तक उनकी चार पुस्तकें क्रमवार प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि नए संसद भवन के उद्घाटन को भारतीय संस्कृति की पुनःप्राप्ति का भावनात्मक अवसर मानते हुए, उस ऐतिहासिक क्षण को संजोने के लिए यह पुस्तक लिखी गई।

अटल प्रकाशन की ओर से उपासना काबरा ने पुस्तक के विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 307 पृष्ठों की यह कृति नए संसद भवन के वास्तु, पौराणिक विरासत और आधुनिक भारत के अद्भुत संगम को विवेचित करती है। इसमें नए संसद भवन के निर्माण के संकल्प से जुड़ी देश की भावनात्मक मनःस्थिति और वैचारिकी का विस्तार से वर्णन है।

लोकार्पण के उपरांत अपने उद्बोधन में महामहिम राज्यपाल गुरमीत सिंह ने प्रो. के.पी. सिंह को इस अद्वितीय पुस्तक के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए हमें स्वयं खड़ा होना पड़ेगा, यही नए संसद भवन का मूल विचार है। उनके शब्दों में, संसद का नयापन, राष्ट्र का नयापन है। नया संसद भवन 21वीं सदी के भारत की हुंकार और विश्वगुरु भारत की आकांक्षाओं का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है और यह संसद भवन भारत की अपनी थाती को समेटे हुए है, जिसमें त्याग, समन्वय और समरसता की प्रेरणा झलकती है।

Launch of Prof. K.P. Singh's book 'New Parliament - The Voice of India'
प्रो. के.पी. सिंह की पुस्तक न्यू पार्लियामेंट- द वॉयस ऑफ भारत’ का लोकार्पण

राज्यपाल ने कहा कि नए संसद भवन के उद्घाटन के समय भारत के हृदय के उद्गार इस पुस्तक में सजीव रूप से प्रतिबिंबित हैं। प्रो. के.पी. सिंह को वे चुनौतियों को स्वीकार करने वाला विद्वान बताते हुए बोले कि आधुनिक पुस्तकालय विज्ञान को उन्होंने एक सक्रिय, सृजनात्मक मंच का रूप दिया है। नए संसद भवन के निर्माण को उन्होंने रिकार्ड समय में पूर्ण हुआ अद्वितीय प्रोजेक्ट बताया, जिसमें वैदिक काल की छाप, मौर्य वंश के प्रतीक, चोल कालीन मंदिरों की झलक, भारतीयता से ओतप्रोत भित्ति चित्र, छायाचित्र तथा सेंगोल की स्थापना तक, सब कुछ भारतमय रूप में उपस्थित है। एक-एक पत्थर और भित्ति चित्र प्राचीन भारत को आधुनिक भारत से जोड़ता है।

राज्यपाल ने इसे जीवंत भारत और भारतीयता की आत्मा का भवन बताया और प्रधानमंत्री के उस संदेश का उल्लेख किया जिसमें भाव व्यक्त हुआ था नवीन पर्व के लिए नवीन प्राण चाहिए, मुक्त मातृभूमि को नवीन मान चाहिए। उन्होंने कहा कि नए संसद भवन और इस पुस्तक के माध्यम से परतंत्रता की मानसिकता से मुक्ति पाकर भारत की वास्तविक स्वतंत्रता के भाव को हमने आत्मसात किया है।

राष्ट्रीय सैनिक संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष टी.पी. त्यागी ने संदेश में कहा कि नया संसद भवन वीर सैनिकों के त्याग, बलिदान और राष्ट्रनिष्ठा का भी प्रतीक है, जो नई पीढ़ी को कर्तव्य और राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देता है। स्कोडा कम्पनी के सीनियर एडवाइजर राजन छिब्बर ने अपने संदेश में इसे आत्मनिर्भर, आधुनिक और सशक्त भारत की संस्थागत पहचान बताया, जो लोकतंत्र की गरिमा और नागरिकों के विश्वास को नई ऊंचाई देता है।

कार्यक्रम के अंत में दिल्ली विश्वविद्यालय के पुस्तकालय विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. आर.के. भट्ट ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पिंकी शर्मा ने किया। अवसर पर पुस्तकालय विज्ञान विभाग के प्रो. राकेश कुमार भट्ट, दयाल सिंह कॉलेज की प्राचार्य प्रो. भावना पाण्डेय, श्री अरविंदो कॉलेज के प्रो. हंसराज सुमन, प्रो. जे.एन. सिंह, प्रो. मीरा, डॉ. मनीष कुमार, डॉ. पिंकी शर्मा, अटल प्रकाशन से संदीप जैन, उन्नत जैन, उपासना काबरा सहित अनेक शिक्षाविद, समाजसेवी एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।

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