January 7, 2026

कवि दलीचंद जांगिड़ की कलम से: बुरा न बोलो, बुरा न सुनो और नहीं बुरा देखो

From the pen of poet Dalichand Jangid: Do not speak ill, do not listen to ill and do not see ill

कवि दलीचंद जांगिड़।

हर काम सोच समझकर करिये, कारण आपके हर शब्द ईश्वरीय रिकॉर्ड व्यवस्था (कुदरत में) में दर्ज होकर “ऐवरी ऐक्शन ईज इकवल ऐन्ड परमानेनट रि ऐक्शन” वही वापस फल के रुप में लौट आएगा कारण आप जो बोएंगे वही काटेंगे,वही पायेंगे… तोल-मोल कर बोलो कारण आप ईश्वर के सी. सी.टी.वी.की नजरों में है, और आपके हर बोल (शब्द) व क्रिया (कर्म) रेकार्ड हो रही है तथा इसी पर ईश्वरीय अदालत में निर्णय (फैसला) सुनाया जाएगा….?

कुदरत सुनती है आपके शब्द
गुरुजी अपने प्रवचनों में कहते है कि दर असल, लोगों को यह नहीं मालूम कि जो वे कह रहे है, कुदरत उनकी ही बात सुनकर “तथास्तु” कह रही है यानी आप जो चाहते है वैसा ही हो। मनुष्य बार-बार नकारात्मक बोलकर अपने जीवन में दु:ख – दर्द को ही आमंत्रित कर रहा है और दोष भाग्य को दे रहा है। इन सब बातों का विश्लेषण कर आज का अनुसंधान भी यही कहता है कि आप जो दोहराओगे वही पाओगे या हर रोज की आद्दत भी वैसी ही बन जाएगी। आजकल यह वैज्ञानिक युग है, आज तो रिसर्ज द्वारा यह भी पता लगाया जा चुका है की शब्दों की अपनी एनर्जी होती है। हम जो भी बोलते है या कर्म करते है वह बूमरेंग की तरह लौटकर हमारे ही पास वापस आता है, यही प्रकृति का अट्टल नियम है। इतनी समज होने के बाद फिर क्यूँ मनुष्य अपने नकारात्मक शब्दों की ऊर्जा को फैलाकर अपने जीवन में नकारात्मकता को आमंत्रित करे…? क्यो न अपने शब्दों में सकारात्मक ऊर्जा का आवाह्न करे, अपने जीवन के साथ – साथ वातावरण में भी सकारात्मक ऊर्जा फैलाएं – – ताकी खुद भला हो ओर दूसरों का भी भला हो।

“मनुष्य जीवन अनमोल है” सम्भलकर चलो रास्तें में खतरें अनेक है, जरा जुबान फिसल (गलती करेंगे तो) तो हर्जाना भूगतना हि पड़ेगा, कारण कुदरत तुम्हारे शब्द सुनती है और नकरात्मक बोल कर स्वयं ही अपने जीवन में दु:खों को आमंत्रण नहीं दे, फिर दोष भाग्य को देकर पल्ला नहीं जाड़े, ऐसा करने से “कर्म दोष” लगता है। इसीलिए प्रबुद्ध ज्ञानी जन कहते है की बुरा न बोले, बुरा न सुने और न ही बुरा देखे, तो जीवन की राह हो जाये आसान।
जय श्री ब्रह्म ऋषि अंगिरा जी

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