एक्यूआई 450 पार, ग्रेप-4 लागू, गन्नौर गाेहाना, राई उद्योगों पर सख्त कार्रवाई
सोनीपत: वायु गुणवत्ता के लगातार बिगड़ते हालात पर सनपेड़ा की एक फैक्ट्री में पहुंची जांच टीम।
- सोनीपत गन्नौर के सनपेड़ा, रामनगर, धतूरी, गोहाना, राई कुण्डली और प्याऊमनियारी में एक साथ की रेड
सोनीपत। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता के लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए एयर क्वालिटी इंडेक्स 450 से ऊपर गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है। इस स्थिति में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों एवं वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा संचालित ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के चौथे चरण को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
उपायुक्त सुशील सारवान ने बताया कि यह चरण तब लागू किया जाता है जब वायु प्रदूषण मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक स्तर पर पहुंच जाए। सोनीपत जिले में भी बीते कई दिनों से एक्यूआई 450 से ऊपर बहुत खराब श्रेणी में बना हुआ है, जिसके चलते प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं।
ग्रेप-4 के तहत जिले में निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इसके साथ ही बीएस-4 तक के पेट्रोल और डीजल वाहनों के संचालन पर रोक, गैर-स्वच्छ ईंधन आधारित उद्योगों को बंद करना, डीजल जनरेटरों के उपयोग पर प्रतिबंध, कोयले जैसे प्रदूषणकारी ईंधन पर रोक, सड़कों पर यांत्रिक झाड़ू चलाना तथा जल छिड़काव बढ़ाने जैसे उपाय लागू किए गए हैं। इन सभी कदमों का उद्देश्य धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और वाहन प्रदूषण को तुरंत कम करना है।
ग्रेप-4 की पूर्ण पालना सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने गुरुवार को राई रेस्ट हाउस से व्यापक अभियान की शुरुआत की। पूरे दिन चले इस अभियान में विभिन्न क्षेत्रों में उद्योगों और निर्माण स्थलों की सघन जांच की गई। यह कार्रवाई वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप की गई।
निरीक्षण के दौरान उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों, उपयोग किए जा रहे ईंधन, उत्सर्जन मानकों की पालना, अपशिष्ट प्रबंधन और धूल नियंत्रण व्यवस्थाओं की जांच की गई। खरखौदा क्षेत्र में उपमंडल अधिकारी के नेतृत्व में चलाए गए अभियान के दौरान फिरोजपुर बांगर इलाके में करीब 20 फैक्ट्रियों में पिट भट्टियां जलती हुई पाई गईं। इन्हें तुरंत बंद करवाया गया और संबंधित रिपोर्ट वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को कार्रवाई के लिए भेजी गई।
गोहाना क्षेत्र, सोनीपत में कुण्डली और प्याऊमनियारी इलाके में जांच के दौरान कई फैक्ट्रियों की छतों पर भारी मात्रा में धूल पाई गई। कई उद्योगों में प्रतिबंधित डीजल जनरेटर भी मिले, साथ ही कुछ इकाइयों में वायु गुणवत्ता निगरानी उपकरण उपलब्ध नहीं थे। इन सभी मामलों में संबंधित टीमों द्वारा कार्रवाई की गई।
गन्नौर क्षेत्र के सनपेड़ा, रामनगर, धतूरी, कामी रोड सहित कई स्थानों पर निर्माण गतिविधियां जारी पाई गईं, जो ग्रेप-4 के तहत प्रतिबंधित हैं। इसके अलावा कई चावल मिलों में कोयला जलता मिला। जिले में आयुर्वेदिक दवा कंपनियों की जांच में भी अनेक खामियां सामने आईं, जिनकी रिपोर्ट आयोग को भेजी गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
