डोडा हादसा: खाई में गिरी सेना की गाड़ी 10 जवान शहीद; एक साल में चार हादसे, जवानों की सुरक्षा पर कब लगेगा ब्रेक?
जम्मू-कश्मीर में ऊपरी पोस्ट पर जाते वक्त सेना का वाहन खाई में गिर गया। घायल जवानों को हेलिकॉप्टर से एयरलिफ्ट किया गया।
जम्मू-कश्मीर। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में गुरुवार को एक दर्दनाक हादसे में सेना की गाड़ी 400 फीट गहरी खाई में गिर गई। इस हादसे में 10 जवानों की मौत हो गई, जबकि 11 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को एयरलिफ्ट कर उधमपुर मिलिट्री हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। हादसा भद्रवाह-चंबा इंटरस्टेट रोड पर खन्नी टॉप के पास हुआ। डोडा के डिप्टी कमिश्नर हरविंदर सिंह के मुताबिक सड़क पर जमी बर्फ के कारण चालक का वाहन से नियंत्रण हट गया।
ऊपरी पोस्ट पर जा रहे थे जवान
सेना के अनुसार गाड़ी में कुल 21 जवान सवार थे, जो डोडा से ऊपरी पोस्ट की ओर जा रहे थे। अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि शहीद और घायल जवान किन राज्यों से हैं। भद्रवाह-चंबा रोड जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश को जोड़ती है, लेकिन इसकी भौगोलिक बनावट इसे बेहद खतरनाक बनाती है।
खन्नी टॉप: ऊंचाई और मौसम बना जानलेवा
जहां यह हादसा हुआ, वह खन्नी टॉप इलाका करीब 9 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां मौसम बेहद तेजी से बदलता है। घना कोहरा, कड़ाके की ठंड और बर्फबारी के बाद सड़क पर फिसलन आम बात है। सड़क संकरी है और कई जगह तीखे मोड़ हैं, जिससे जरा सी चूक जानलेवा साबित हो जाती है।
एक साल में चार बड़े हादसे, सवाल बरकरार
पिछले एक साल में सशस्त्र बलों से जुड़े चार बड़े सड़क हादसे हो चुके हैं। जनवरी 2025 में बांदीपोरा में सेना का ट्रक खाई में गिरा, जिसमें चार जवान मारे गए। मार्च 2025 में मणिपुर के सेनापति जिले में बीएसएफ की गाड़ी हादसे का शिकार हुई, तीन जवानों की मौत और 13 घायल हुए। मई 2025 में रामबन जिले में वाहन 600 मीटर गहरी खाई में गिरा, तीन जवानों की जान गई। अगस्त 2025 में उधमपुर के बसंतगढ़ में सीआरपीएफ की बंकर गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हुई, जिसमें तीन जवान मारे गए।
नेताओं ने जताया शोक, लेकिन समाधान कब?
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, प्रियंका गांधी और महबूबा मुफ्ती ने हादसे पर दुख जताया है। सवाल यह है कि जब लगातार हादसे हो रहे हैं, तो खतरनाक इलाकों में सड़कों की सुरक्षा, वाहनों की तकनीकी जांच और जवानों की आवाजाही के लिए ठोस नीति कब बनेगी? तीन दिन पहले किश्तवाड़ में मुठभेड़ में एक जवान के शहीद होने के बाद यह हादसा सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
