January 26, 2026

बसंत पंचमी 2026: ज्ञान की देवी सरस्वती की आराधना से जीवन में आएगा ज्ञान और सकारात्मकता का बसंत

Basant Panchami today: Worshiping Saraswati, the goddess of knowledge, will bring spring of knowledge and positivity in your life.

बसंत पंचमी 2026

कल यानी 23 जनवरी को देशभर में बसंत पंचमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह पर्व ज्ञान, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती के प्रकट उत्सव के रूप में जाना जाता है। खासतौर पर विद्यार्थियों, शिक्षकों, कलाकारों और शिक्षा से जुड़े लोगों के लिए बसंत पंचमी एक महापर्व मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती की विधिवत पूजा करने से बुद्धि, एकाग्रता और सफलता प्राप्त होती है तथा पढ़ाई-लिखाई में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार बसंत पंचमी का महत्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक भी है। यह पर्व ऋतु परिवर्तन का संकेत देता है। कड़ाके की सर्दी के बाद बसंत ऋतु की शुरुआत होती है, जिससे प्रकृति में नयापन और उल्लास दिखाई देता है। खेतों में सरसों के पीले फूल खिल उठते हैं और वातावरण में एक नई ऊर्जा का संचार होता है। पीला रंग ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिन पीले वस्त्र पहनने और पीले रंग के पदार्थों का उपयोग करने की परंपरा है। माना जाता है कि पीला रंग आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ तनाव और अवसाद को भी दूर करता है। इसी कारण इस दिन हल्दी और केसर का सेवन शुभ माना गया है।

बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा में ‘ऊँ ऐं सरस्वत्यै नमः’ मंत्र का जप विशेष फलदायी माना जाता है। इस मंत्र के जाप से एकाग्रता बढ़ती है और बुद्धि प्रखर होती है। पूजा के दौरान मां सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर, वीणा, हंस की तस्वीर, मोर पंख, कमल का फूल और कलम या पेन रखना शुभ माना जाता है। ये सभी वस्तुएं विद्या, रचनात्मकता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक हैं।

बसंत पंचमी यह संदेश देती है कि जैसे प्रकृति सर्दी के बाद नए रंगों और ऊर्जा से भर जाती है, वैसे ही हमें भी अपने जीवन में आने वाले बदलावों को सकारात्मक सोच के साथ स्वीकार करना चाहिए और ज्ञान व सद्बुद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए।

About The Author