January 26, 2026

संचार साथी ऐप विवाद पर U-टर्न: केंद्र ने प्री-इंस्टॉलेशन आदेश वापस लिया

U-turn on Sanchar Saathi app controversy: Centre withdraws pre-installation order

संचार साथी एप।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मोबाइल फोन्स में ‘संचार साथी’ ऐप को अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल करने के फैसले को वापस ले लिया है। सरकार का कहना है कि यह निर्णय ऐप की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए लिया गया है। टेलिकॉम विभाग के अनुसार बुधवार दोपहर 12 बजे तक 1.40 करोड़ लोग ऐप को स्वेच्छा से डाउनलोड कर चुके थे, जबकि दो दिनों में डाउनलोड का आंकड़ा सामान्य से 10 गुना अधिक रहा।

लोकसभा में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया कि यह ऐप न तो जासूसी करता है, न ही इसके जरिए किसी प्रकार की निगरानी संभव है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह ऑप्शनल ऐप है, जिसे यूजर अपनी इच्छा से अनइंस्टॉल भी कर सकता है। विपक्ष द्वारा निगरानी संबंधी आरोप लगाए जाने के बाद मंत्रालय ने आदेश में संशोधन किया है।

पूरा विवाद 28 नवंबर को तब शुरू हुआ जब दूरसंचार विभाग ने सभी मोबाइल कंपनियों को नए और पुराने दोनों प्रकार के फोन में सॉफ़्टवेयर अपडेट के जरिए संचार साथी ऐप को अनिवार्य रूप से इंस्टॉल करने का निर्देश दिया था। इसके बाद विपक्ष ने इसे ‘जासूसी ऐप’ बताते हुए विरोध शुरू कर दिया।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ऐपल जैसी कंपनियों के लिए यह आदेश मुश्किल पैदा कर सकता था क्योंकि उनकी पॉलिसी किसी भी सरकारी या थर्ड-पार्टी ऐप को प्री-इंस्टॉल करने की अनुमति नहीं देती।

संचार साथी एक साइबर सुरक्षा ऐप है, जिसे साइबर फ्रॉड, फर्जी IMEI, चोरी के फोन और स्कैम कॉल की रिपोर्टिंग के लिए विकसित किया गया है। सरकार का दावा है कि इस ऐप की मदद से अब तक लाखों गुम हुए मोबाइल फोन ट्रेस किए जा चुके हैं।

हालांकि सरकार ने प्री-इंस्टॉलेशन आदेश वापस ले लिया है, लेकिन ऐप की बढ़ती लोकप्रियता यह दिखाती है कि यूजर्स सुरक्षा संबंधी टूल्स अपनाने के प्रति जागरूक हो रहे हैं।

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