क्रिकेट: एशेज के साथ उस्मान ख्वाजा का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास, नस्लवाद और दोहरे मानदंडों पर खुलकर बोले
उस्मान ख्वाजा ने 2011 में सिडनी में इंग्लैंड के खिलाफ मैच से डेब्यू किया था।
ऑस्ट्रेलिया। ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी ओपनिंग बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (SCG) में खेला जाने वाला एशेज सीरीज का आखिरी टेस्ट उनके करियर का अंतिम अंतरराष्ट्रीय मुकाबला होगा। संन्यास की घोषणा करते हुए ख्वाजा ने न सिर्फ अपने फैसले की वजह बताई, बल्कि अपने पूरे करियर के दौरान झेले गए नस्लीय भेदभाव, स्टीरियोटाइप्स और टीम मैनेजमेंट के दोहरे रवैये पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी मूल और मुस्लिम पहचान के कारण उन्हें कई बार अलग नजर से देखा गया और अनुचित आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। ख्वाजा ने इसे सिर्फ व्यक्तिगत अनुभव नहीं, बल्कि खेल के भीतर मौजूद एक गंभीर समस्या बताया।
उस्मान ख्वाजा ने कहा कि उनके पूरे करियर में उन्हें बार-बार आलसी, गैर-जिम्मेदार और टीम के प्रति प्रतिबद्ध न होने वाला बताकर पेश किया गया, जबकि ये आरोप नस्लीय स्टीरियोटाइप्स का हिस्सा थे। उन्होंने कहा कि चोटिल होने के दौरान लगातार कई दिनों तक उनकी आलोचना की गई, जबकि पूरी जानकारी के बिना मीडिया और कुछ पूर्व खिलाड़ी सवाल उठाते रहे।
ख्वाजा ने पर्थ टेस्ट से पहले गोल्फ खेलने को लेकर हुई आलोचना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई खिलाड़ी मैच से पहले गोल्फ खेलते हैं या शराब पीते हैं, लेकिन उन्हें ‘ऑस्ट्रेलियन लैरिकिन्स’ कहकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। वहीं, जब वे चोटिल हुए तो सीधे उनकी साख पर सवाल खड़े कर दिए गए।
संन्यास की घोषणा के दौरान ख्वाजा के साथ उनकी पत्नी रेचल, बच्चे और परिवार के सदस्य मौजूद थे। उन्होंने बताया कि इस फैसले पर लंबे समय से विचार चल रहा था और पत्नी से बातचीत के बाद उन्होंने इसे अंतिम रूप दिया। ख्वाजा ने कहा कि टीम के मुख्य कोच एंड्रयू मैकडोनाल्ड और मैनेजमेंट उन्हें आगे भी खेलते देखना चाहते थे, यहां तक कि 2027 भारत दौरे को लेकर भी चर्चा हुई थी, लेकिन उन्होंने अपने फैसले पर कायम रहना ही बेहतर समझा।
उन्होंने माना कि एडिलेड टेस्ट में शुरुआती प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा जाना उनके लिए टर्निंग पॉइंट था। हालांकि बाद में मौका मिलने पर उन्होंने उपयोगी पारियां खेलीं। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उनके योगदान को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि ख्वाजा का प्रभाव लंबे समय तक याद रखा जाएगा। संन्यास के बाद भी वे बिग बैश लीग और घरेलू क्रिकेट में सक्रिय रहेंगे।
