January 6, 2026

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के शिल्पकार राम वानजी सुथार का निधन, 100 साल की उम्र में थमी महान मूर्तिकार की छेनी

Statue of Unity sculptor Ram Vanji Suthar passes away at the age of 100.

बढ़ई परिवार में जन्म, पिता से सीखी कला।

नई दिल्ली। दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ को आकार देने वाले महान मूर्तिकार राम वानजी सुथार का गुरुवार, 18 दिसंबर को निधन हो गया। वे 100 वर्ष के थे और लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। एक बढ़ई परिवार में जन्मे सुथार ने अपनी छेनी-हथौड़ी से भारत के इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना को पत्थर और कांसे में ढाल दिया। संसद भवन परिसर में ध्यान मुद्रा में बैठे महात्मा गांधी की प्रतिमा हो या दिल्ली में घोड़े पर सवार छत्रपति शिवाजी महाराज की भव्य मूर्ति—उनकी कृतियां देश की पहचान बन चुकी हैं। सुथार का जीवन संघर्ष, साधना और सृजन की ऐसी कहानी है, जिसने उन्हें साधारण कारीगर से वैश्विक पहचान वाला शिल्पकार बना दिया।

Statue of Unity sculptor Ram Vanji Suthar passes away at the age of 100.
जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स से तराशी पहचान।

बढ़ई परिवार में जन्म, पिता से सीखी कला

महाराष्ट्र के एक साधारण बढ़ई परिवार में जन्मे राम वानजी सुथार के पिता कारपेंटर का काम करते थे। वे खेती के औजार, बैलगाड़ियां और घरेलू उपयोग की चीजें बनाते थे। बचपन में राम सुतार पिता के साथ कार्यशाला में समय बिताते थे। वहीं उन्होंने छेनी और हथौड़ी चलाना सीखा। लकड़ी और पत्थर से आकृतियां उकेरने की यह शुरुआती ट्रेनिंग आगे चलकर उनके जीवन की दिशा तय करने वाली साबित हुई।

Statue of Unity sculptor Ram Vanji Suthar passes away at the age of 100.
1,150 से ज्यादा मूर्तियां, विरासत बन गया नाम।

गांव से धूलिया तक शिक्षा का सफर

राम सुथार की शुरुआती पढ़ाई गांव में ही चौथी कक्षा तक हुई। इसके बाद पास के गांवों में पांचवीं और छठी की पढ़ाई की और फिर वे धूलिया पहुंचे। यहीं से उन्होंने मैट्रिकुलेशन पूरा किया। धूलिया में ही उनकी मुलाकात ड्रॉइंग टीचर श्री रामकृष्ण जोशी से हुई, जिन्होंने सुतार की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

Statue of Unity sculptor Ram Vanji Suthar passes away at the age of 100.
अजंता-एलोरा से दिल्ली तक का सफर।

जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स से तराशी पहचान

ड्रॉइंग टीचर जोशी की प्रेरणा से राम सुथार मुंबई पहुंचे और प्रतिष्ठित जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स में दाखिला लिया। यहां उन्होंने मूर्तिकला की बारीकियां सीखीं। जोशी ने उनके रहने और खाने की भी व्यवस्था करवाई। सुतार ने पांच साल का कोर्स चार साल में पूरा किया और गोल्ड मेडलिस्ट रहे। यही वह दौर था, जिसने उन्हें एक परिपक्व कलाकार के रूप में गढ़ा।

अजंता-एलोरा से दिल्ली तक का सफर

कॉलेज के बाद उन्होंने कर्माकर नामक शिल्पकार के साथ काम किया और फिर अजंता और एलोरा की गुफाओं में संरक्षण और मरम्मत का जिम्मा संभाला। चार साल तक उन्होंने ऐतिहासिक मूर्तियों को संवारने का काम किया। इसके बाद वे दिल्ली आए और DAVP में सरकारी नौकरी की, लेकिन कला की पुकार उन्हें चैन से बैठने नहीं देती थी।

Statue of Unity sculptor Ram Vanji Suthar passes away at the age of 100.
सरकारी नौकरी छोड़कर मूर्ति बनाने लगे।

सरकारी नौकरी छोड़ चुना सृजन का रास्ता

प्रगति मैदान में किसानों की विशाल मूर्तियां बनाने का अवसर मिला तो सुथार ने सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद संसद परिसर में अशोक स्तंभ स्थापित करने का काम मिला और यहीं से उनके करियर ने नई ऊंचाई पकड़ी।

1,150 से ज्यादा मूर्तियां, विरासत बन गया नाम

राम सुथार ने 1942 में अपनी पहली मूर्ति बनाई और जीवनभर में 1,150 से अधिक मूर्तियों का सृजन किया। भारत ही नहीं, विदेशों में भी उनकी कृतियां स्थापित हैं। उन्होंने कहा था कि बड़ी मूर्तियां बनाने की इच्छा उन्हें विरासत में मिली, क्योंकि उनके पिता भी भगवान गणेश की विशाल प्रतिमाएं बनाते थे।

राम वानजी सुथार का जाना भारतीय कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है, लेकिन उनकी मूर्तियां उन्हें हमेशा जीवित रखेंगी।

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