शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: व्यथित मन से माघ मेला छोड़कर काशी रवाना हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, बोले– बिना स्नान ही लौटना पड़ रहा है
व्यथित मन से माघ मेला छोड़कर काशी रवाना हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद।
प्रयागराज। प्रयागराज माघ मेले से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आधिकारिक रूप से विदाई ले ली है। विवादों और प्रशासन से टकराव के बीच वह बिना स्नान किए ही काशी के लिए रवाना हो गए। मेला छोड़ने से पहले बुधवार सुबह आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि उनका मन इतना व्यथित और आहत है कि पवित्र संगम में स्नान भी उन्हें शांति नहीं दे सकता। शंकराचार्य ने कहा कि प्रयागराज हमेशा से आस्था और शांति की धरती रहा है और वह श्रद्धा के भाव से यहां आए थे, लेकिन एक ऐसी घटना हुई जिसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सनातनी प्रतीकों का अपमान हुआ है और जिन लोगों ने यह किया है, उन्हें उनकी औकात दिखानी होगी।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि माघ मेला प्रशासन की ओर से उन्हें एक पत्र और प्रस्ताव भेजा गया था, जिसमें पूरे सम्मान के साथ पालकी में बैठाकर संगम ले जाने, स्नान कराने और फूल बरसाने की बात कही गई थी। हालांकि उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उनका कहना था कि जब दिल में दुख और गुस्सा हो, तब पवित्र जल भी मन को शांति नहीं दे पाता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन ने अपने प्रस्ताव में मौनी अमावस्या की घटना को लेकर न तो जिम्मेदारी ली और न ही माफी मांगी, जबकि सच्चा सम्मान तभी होता है जब गलती स्वीकार कर ईमानदारी से माफी मांगी जाए।
माघ मेला 15 फरवरी तक चलना है और अभी माघी पूर्णिमा तथा महाशिवरात्रि के दो बड़े स्नान शेष थे, लेकिन शंकराचार्य ने विवाद के चलते मेला 18 दिन पहले ही छोड़ दिया। मौनी अमावस्या के दिन प्रशासन से हुए विवाद के बाद वह बिना स्नान लौट गए थे और बसंत पंचमी पर भी उन्होंने स्नान नहीं किया था। अब वह शेष दोनों स्नानों में भी शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि अगर पहले पालकी से स्नान कराना गलत था तो अब वही सही कैसे हो गया। संतों, संन्यासियों और ब्रह्मचारियों के साथ हुई कथित मारपीट और अपमान की भरपाई केवल दिखावटी सम्मान से नहीं की जा सकती।
इस पूरे मामले ने अब कानूनी रूप भी ले लिया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई कथित बदसलूकी को लेकर मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। अधिवक्ता गौरव द्विवेदी ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को लेटर पिटिशन भेजकर पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग की है। याचिका में धार्मिक अनुष्ठान में बाधा, बटुक शिष्यों के साथ मारपीट और नाबालिगों को हिरासत में लेने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिन्हें किशोर न्याय अधिनियम का उल्लंघन बताया गया है।
18 जनवरी को माघ मेले में स्नान के लिए जाते समय शंकराचार्य की पालकी रोके जाने और शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की के आरोप के बाद से यह विवाद लगातार गहराता गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक बयान के बाद मामला और राजनीतिक रंग लेने लगा, जिससे संत समाज भी दो हिस्सों में बंट गया। अब शंकराचार्य के मेला छोड़ने के ऐलान के बाद उनका शिविर हटाया जा रहा है और सामान गाड़ियों में लादकर ले जाया जा रहा है। शंकराचार्य ने साफ कहा है कि अगर सनातनी समाज चाहेगा तो वह इस मुद्दे पर शांत नहीं बैठेंगे और न्याय के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
