सतकुंभा उत्सव 2026: आध्यात्मिक आस्था और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत संगम सतकुंभा उत्सव
सोनीपत: श्री महंत राजेश स्वरुप महाराज भाजपा जिला महामंत्री नीरज व उनकी पत्नी दीप्ति को सतकुंभा उत्सव में आशीर्वाद देते हुए।
- सतकुंभा उत्सव तृतीय दिवस: शिव स्तुति पर झूमे शिव भक्त
सोनीपत, अजीत कुमार। सोनीपत में सात दिवसीय सतकुंभा उत्सव के तीसरे दिन आध्यात्मिक आस्था और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। रुद्र महायज्ञ में आहुति डालकर विश्व कल्याण, आत्म सुधार, सकारात्मक सोच और शिव के प्रति अटूट श्रद्धा का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बडाैली की पत्नी गीता कौशिक ने महिला वर्ग की ओर से सप्तऋषियों की तपोभूमि भाजपा जिला महामंत्री नीरज ठरु और उनकी पत्नी दीप्ति ने रुद्र महायज्ञ का शुभारंभ किया तथा पीठाधीश्वर श्रीमहंत राजेश स्वरुप महाराज के सान्निध्य में हवन में आहुति दी। पीठाधीश्वर ने आशीर्वचन में कहा कि सतकुंभा सप्तऋषियों की तपस्थली है, जहां से त्याग, तप और लोककल्याण का संदेश संपूर्ण समाज को मिला। उन्होंने आह्वान किया कि उत्सव का उद्देश्य केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और विश्व शांति की भावना को जागृत करना है।
सतकुंभा का स्मरण करते हुए कहा कि यह भूमि केवल इतिहास नहीं, बल्कि आत्मजागरण की जीवंत प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति यदि संस्कार और साधना से जुड़ जाए तो समाज में नैतिकता और संतुलन स्वतः स्थापित हो जाता है। कृष्णा खत्री, पुनम और नीरु गोयल ने भी धर्म को जीवन में उतारने और विचारों में पवित्रता लाने का आह्वान किया। वक्ताओं का सतकुंभा प्रबंधन समिति सदस्य सूरज शास्त्री की ओर से सम्मानित किया गया।
हरियाणा कला संस्कृति विभाग से हिमांशु एंड पार्टी के कलाकारों ने शिव साधना और आराधना पर आधारित भक्ति गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कलाकारों की स्वर लहरियों पर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
उत्तराखंड से आए आचार्य शिवम कौशिक और श्रीकांत रतुरी ने वेद ऋचाओं का उच्चारण कर वैदिक परंपरा की गरिमा बढ़ाई। कार्यक्रम में बलविंद्र कौर, खुशमित कौर, अमृता कौर अंबाला से, सुरेंद्र मलिक, ब्रह्मपाल, प्रधान सेठपाल, जिंदा छौक्कर, सुल्तान छौक्कर, प्रकाश, प्रवीण सैनी, विनोद सैनी, सुनील सैनी, महाबीर छौक्कर, सोमबीर शास्त्री, रणजीत पंडित, आशीष वर्मा, प्रवेश कौशिक और जयसिंह सिटावली सहित अनेक श्रद्धालुओं ने सेवाएं दी। सतकुंभा उत्सव का तीसरा दिन शिव भक्ति, वैदिक ध्वनि और सांस्कृतिक एकता के संदेश के साथ संपन्न हुआ।
सतकुंभा उत्सव एक नजर में










